Samachar Nama
×

वेदा कृष्णमूर्ति बर्थडे: 'बड़े सपनों वाली एक छोटे शहर की लड़की', कराटे से क्रिकेट तक का यादगार सफर

वेदा कृष्णमूर्ति बर्थडे: 'बड़े सपनों वाली एक छोटे शहर की लड़की', कराटे से क्रिकेट तक का यादगार सफर
वेदा कृष्णमूर्ति बर्थडे: 'बड़े सपनों वाली एक छोटे शहर की लड़की', कराटे से क्रिकेट तक का यादगार सफर

नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। वेदा कृष्णमूर्ति भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक ऐसी क्रिकेटर रही हैं जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और स्टाइलिश अंदाज के दम पर बड़ी लोकप्रियता हासिल की। वेदा ने न सिर्फ भारतीय टीम के लिए दमदार प्रदर्शन किया, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग में भी अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया।

वेदा कृष्णमूर्ति का जन्म 16 अक्टूबर 1992 को कर्नाटक के चिकमंगलुरु में हुआ था। वह तीन साल की उम्र से क्रिकेट खेल रही हैं। बचपन में उन्हें कराटे की ट्रेनिंग भी दिलवाई गई थी। वेदा को कराटे पसंद नहीं था, लेकिन घर के दबाव में उन्होंने कराटे सीखा और 12 साल की उम्र में ब्लैक बेल्ट जीता। 13 साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट की ट्रेनिंग लेनी शुरू की और फिर क्रिकेट को ही उन्होंने अपना जीवन बना लिया।

वेदा ने जून 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। इसी महीने इंग्लैंड के खिलाफ उनका वनडे करियर भी शुरू हुआ। वेदा ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 8 मार्च 2020 को खेला था। लगभग 10 साल के करियर में उन्होंने भारत के लिए 48 वनडे और 76 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। वनडे में उन्होंने 829 और टी20 में 875 रन बनाए। वनडे करियर में वेदा ने 8 अर्धशतक लगाए। 2017 महिला विश्व कप में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 45 गेंदों पर 70 रनों की ताबड़तोड़ और यादगार पारी खेली थी। यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन पारियों में एक रही। वेदा 2017 में वनडे विश्व कप और 2020 में टी20 विश्व कप का फाइनल खेलने वाली टीम की सदस्य थीं।

जुलाई 2025 में वेदा कृष्णमूर्ती ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कह दिया था।

वेदा ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट करते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा था। उन्होंने लिखा, "एक छोटे शहर की लड़की, जिसके सपने बड़े थे। कदुर में यह सब शुरू हुआ। जब मैंने बल्ला उठाया था, तो सिर्फ इतना पता था कि इस खेल से मुझे प्यार है। कहां तक जाऊंगी, इसका अंदाजा नहीं था। मुझे गर्व है कि संकरी गलियों से दुनिया के बड़े स्टेडियमों तक खेलने का मौका मिला। क्रिकेट ने मुझे करियर से बढ़कर बहुत कुछ दिया। मुझे मेरे होने का एहसास दिलाया। इसने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ना है, कैसे गिरना है, और कैसे खुद को साबित करना है। आज, पूरे दिल से, मैं इस अध्याय को विराम दे रही हूं।"

कृष्णमूर्ती क्रिकेटर के रूप में संन्यास के बाद क्रिकेट विश्लेषक के रूप में लोकप्रियता बटोर रही हैं।

--आईएएनएस

पीएके

Share this story