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वाव-थराद में बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का विस्तार, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ई-लोकार्पण

वाव-थराद में बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का विस्तार, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ई-लोकार्पण
वाव-थराद में बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का विस्तार, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ई-लोकार्पण

गांधीनगर, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को वाव-थराद जिले की दियोदर तहसील के सणादर गांव में बनास डेयरी के विस्तारित फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का ई-लोकार्पण करेंगे। बनास डेयरी ने अप्रैल-2026 में फ्रेंच फ्राइज का उत्पादन और पैकिंग लाइन की क्षमता बढ़ाने का काम शुरू किया था। 51.65 करोड़ रुपए के निवेश से प्लांट की उत्पादन क्षमता अब प्रति घंटे 2 टन से बढ़कर 5 टन हो जाएगी। इस विस्तार से आलू की प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण) को गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय आलू उत्पादकों को और बेहतर दाम तथा नए बाजार अवसर मिल सकेंगे।

बनासकांठा आलू उत्पादन के मामले में एक अग्रणी जिला है। गत 25 वर्षों में प्रोसेसिंग-ग्रेड आलू की खेती का रकबा लगभग 400 हेक्टेयर से बढ़कर 61,016 हेक्टेयर हो गया है। वर्ष 2024-25 में जिले में लगभग 18.7 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था, जबकि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता लगभग 30 टन थी। यह क्षेत्र अपनी उपजाऊ भूमि, अनुकूल जलवायु और अत्याधुनिक खेती प्रणाली के कारण चिप-ग्रेड और फ्रेंच फ्राइज-ग्रेड आलू के उत्पादन के लिए आदर्श माना जाता है।

इसके अलावा, आलू की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग बायोगैस के उत्पादन के लिए किया जाता है, जबकि बचे हुए अवशेष का खेती के लिए पुनः उपयोग होता है।

बनास डेयरी ने वर्ष 2019 में अमूल ब्रांड के अंतर्गत फ्रेंच फ्राइज सेगमेंट में प्रवेश किया था। तब से, डेयरी ने ‘सीड टू फ्राई’ की एक ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जो गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने, आलू की खेती, खरीद और प्रोसेसिंग को एक-दूसरे के साथ जोड़ती है। यह प्रक्रिया केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सेंट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टीट्यूट-सीपीआरआई) सहित अन्य संस्थानों से मिले रोगमुक्त जर्मप्लाज्म से शुरू होती है। इसे बनास डेयरी के टिशू कल्चर लैब में विकसित किया जाता है और बाद में कानपुर की एरोपोनिक फैसेलिटी में जी-0 (जनरेशन जीरो यानी सबसे शुरुआती पीढ़ी का बीज) मिनीट्यूबर्स में विकसित किया जाता है।

इसके बाद इन मिनीट्यूबर्स को खेत में जी-3 स्तर तक विकसित किया जाता है, ताकि किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध हो सके और प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त गुणवत्ता वाले आलू का उत्पादन हो सके।

किसानों को बीज देते समय ही आलू की खरीद कीमत पहले से निर्धारित कर ली जाती है। वर्ष 2023-24 में बनास डेयरी ने आलू किसानों को कीमत की अंतर राशि के तौर पर लगभग 1.83 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। वर्ष 2024-25 के लिए बायबैक कीमत प्रति यूनिट 13 रुपए और वर्ष 2025-26 के लिए प्रति यूनिट 14 रुपए थी।

आलू की मूल्य शृंखला को मजबूत बनाने के लिए बनास डेयरी ने वर्ष 2024 में 10,000 टन की कोल्ड स्टोरेज फैसिलिटी विकसित की थी। इसके अलावा, नवंबर, 2025 में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेज (बीबीएसएसएल) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करके देशभर के किसानों तक प्रमाणित बीज पहुंचाने की दिशा में भी पहल की थी।

वर्ष 2025-26 में, भारत से लगभग 2.77 लाख टन मूल्य वर्धित आलू उत्पादों का निर्यात हुआ था, जिनका मूल्य लगभग 2,744.50 करोड़ रुपए था। सणादर गांव में फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट के विस्तार से आलू के मूल्य वर्धन को गति मिलेगी। गुणवत्तापूर्ण बीज, किसानों से सुव्यवस्थित खरीद, भंडारण सुविधा और बढ़ी हुई प्रोसेसिंग क्षमता के समन्वय से बनासकांठा के आलू उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर खुलेंगे और इस क्षेत्र में कृषि-आधारित उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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