वर्ष 2004 में मुख्तार अंसारी पर हमले में बृजेश सिंह समेत सभी बरी
लखनऊ, 28 मार्च (आईएएनएस)। वर्ष 2004 में लखनऊ में मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के बीच फायरिंग के मामले में दो दशक बाद एमपी एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह पर हत्या का प्रयास, बलवा आदि की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी।
एमपी एमएलए कोर्ट ने बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय, अजय सिंह उर्फ गुड्डू को बरी किया। पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह एमपी एमएलए कोर्ट में मौजूद रहे।
बृजेश सिंह के पक्षकार वकील रोमिल सागर श्रीवास्तव ने आईएएनएस से कहा कि वर्ष 2004 में मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय और 20 से 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उसी घटना की एफआईआर कृष्णानंद राय ने भी कराई थी। दोनों पक्षों ने केस दर्ज कराया था।
उन्होंने बताया कि मुख्तार अंसारी के एफआईआर में जांच करने के बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। कुछ दिनों बाद कृष्णानंद राय की हत्या हो गई थी। बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, अजय राय, अजय सिंह उर्फ गुड्डू के खिलाफ चार्जशीट आई थी और कोर्ट में मुकदमा चला। इस मामले में सात गवाह मुकर गए थे और चार गवाहों ने गवाही दी थी। उनकी गवाही में भी बहुत सारे वेरिएशन थे।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने देखा, समझा और पूरा ट्रायल चलने के बाद कोर्ट का फैसला आया है। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी किया। उन्होंने बताया कि सभी आरोपियों ने अपने आप को निर्दोष बताया। कोर्ट ने पांच लोगों को बरी किया है।
बृजेश सिंह की ओर से पेश वकील वरुण चंद्र ने कहा कि लखनऊ के बहुचर्चित 2004 कैंट फायरिंग मामले में 22 साल बाद बड़ा फैसला सामने आया है। एमपी/एमएलए कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में मुख्य आरोपी बृजेश सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू को भी कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है।
उन्होंने बताया कि यह मामला 13 जनवरी 2004 का है, जब कैंट थाना क्षेत्र स्थित सदर रेलवे क्रॉसिंग पर दो बाहुबली गुटों मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। घटना के बाद मुख्तार अंसारी ने कृष्णानंद राय और बृजेश सिंह समेत अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा समेत कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी।
वकील वरुण चंद्र ने बताया कि लंबे समय तक चले इस मामले में अंततः अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया। यह फैसला एक बार फिर इस पुराने और चर्चित मामले को सुर्खियों में ले आया है। इस फैसले के बाद हम अधिवक्ता और अभियुक्त पक्ष सभी खुश है क्योंकि दोषी पक्ष पिछले 22 साल से कोर्ट के चक्कर काट रहे थे।
बता दें कि 13 जनवरी को 2004 में कैंट थाना क्षेत्र में सदर रेलवे क्रॉसिंग पर दोनों गुटों के बीच फायरिंग हुई थी। इस घटना के एक साल बाद कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2005 में कृष्णानंद राय के काफिले पर 500 गोलियां बरसाई गई थीं। इसमें मुख्तार अंसारी का नाम समाने आया था। इस हमले में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत छह लोगों की मौत हो गई थी।
--आईएएनएस
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