वन्यजीवों के मामले में सनातन संस्कृति पर चल रही मध्य प्रदेश सरकार : मोहन यादव
भोपाल, 22 मई (आईएएनएस) मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीवों के मामले में राज्य सरकार सनातन संस्कृति पर चल रही है। सनातन संस्कृति के अनुसार हमारे वनों में सभी वन्यजीवों की उपस्थिति होनी चाहिए। इस दिशा में राज्य सरकार प्रयास कर रही है। राज्य की राजधानी भोपाल के इंडियान इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस प्री-समिट इवेंट को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को आज चीता स्टेट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है।
चीता प्रोजेक्ट विश्व में वन्यजीवों की पुनर्स्थापना का चमत्कारिक उदाहरण है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को दोबारा बसाना चुनौती पूर्ण था। प्रदेश के वन विभाग ने नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चीतों का नया घर तैयार किया है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की धरती पर 100 साल बाद 8 जंगली भैंसों की वापसी कराई है। इससे हमारे कान्हा नेशनल पार्क की जैव विविधता समृद्ध हुई है। सनातन संस्कृति के अनुसार हमारे वनों में सभी वन्यजीवों की उपस्थिति होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार प्रयास कर रही है। राज्य में दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए, घड़ियाल और गिद्ध का संरक्षण किया गया है। भोपाल से छोड़े गए गिद्ध ने उज्बेकिस्तान तक का सफर तय कर लिया है। कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के लिए 20 बाइक और एक रेस्क्यू ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरीसृपों की बसाहट का कार्य भी किया जा रहा है। प्रदेश में किंग कोबरा लाने के साथ साथ गैंडा लाने की भी तैयारी है। नेशनल पार्कों के आसपास वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जा रहे हैं। ताकि, आवश्यकता पड़ने पर वन्य जीवों को त्वरित रूप से इलाज की सुविधा मिल सके। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि जिसे हम बना नहीं सकते, कम से कम उसे बिगाड़े नहीं। धरती पर उपलब्ध जैव विविधता से हमें भोजन, दवाई और जीवन मिलता है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता में हमने एक वन्यजीव प्रजाति का संरक्षण किया है। चीता घास के मैदानों में रहने वाला वन्यजीव है। उन्होंने कहा कि हम जैव विविधता संरक्षण के कार्य में सर्वे भवन्तु सुखिन: का भाव रखते हैं। जैव विविधता हमारी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है। दुनिया में कितना भी मशीनीकरण आ जाए, लेकिन प्रकृति पर हमारी निर्भरता कभी कम नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। वर्ष 2030 तक हम इस लक्ष्य को पूर्ण करेंगे। सदियों से भारत ने प्रकृति से साथ जीवन जीने की परंपरा को आगे बढ़ाया है। मध्यप्रदेश की जनजातियों की जीवन शैली में यह समृद्ध परंपरा साफ नजर आती हैं। हमें प्राकृतिक खेती और प्रकृति को बचाए रखने में सहयोग करना है।
--आईएएनएस
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