वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस आमने-सामने, तारिक हमीद कर्रा ने सीएम उमर अब्दुल्ला के बयान पर उठाए सवाल
श्रीनगर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका रुख जमीनी हकीकत से कटा हुआ और दुर्भाग्यपूर्ण है।
तारिक हमीद कर्रा ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि कांग्रेस की अपेक्षाएं जम्मू-कश्मीर की सरकार से थीं, न कि आम जनता से। उन्होंने कहा कि इस बहस में जनता को घसीटना उचित नहीं है और सरकार से ही अपने सिद्धांतों पर मजबूती से खड़े रहने की उम्मीद की जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुद्दा सरकार के फैसले का है तो "जम्मू-कश्मीर के लोगों" को इसमें क्यों शामिल किया जा रहा है। कर्रा ने कहा कि सरकार को अपने संवैधानिक और वैचारिक दायित्वों के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए।
कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से दो सवाल भी पूछे। पहला, क्या केरल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस परेड में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाने का फैसला किया था तो किसी व्यक्ति को जेल भेजा गया था? दूसरा, क्या यह उम्मीद करना गलत है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों की तरह धर्मनिरपेक्ष और समावेशी मूल्यों के पक्ष में खड़े हों और राज्य आयोजनों में वंदे मातरम को पहले दो छंदों तक सीमित रखें?
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफजेके) 2026 'रंग-ए-सिनेमा' एक सरकारी कार्यक्रम था, जिसका आयोजन सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) ने संयुक्त रूप से किया था। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किया था, इसलिए समारोह में कौन मौजूद था या नहीं था, यह मुख्य मुद्दा नहीं है।
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब श्रीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह में वंदे मातरम के सभी छंद प्रस्तुत किए गए। कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि पार्टी का रुख वंदे मातरम को केवल पहले दो छंदों तक सीमित रखने का रहा है और उसने अपने सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस से भी इसी परंपरा का पालन करने का आग्रह किया था।
कांग्रेस की इस आपत्ति पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब एक ऐसा कानून लागू है जिसके तहत आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूर्ण प्रस्तुतीकरण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह नियम केवल जम्मू-कश्मीर नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू है और सरकारी कार्यक्रमों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के संबंध में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना हमारी कानूनी जिम्मेदारी है। इसका अनुपालन नहीं करने पर कार्रवाई हो सकती है।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक राजनीतिक दल के रूप में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कभी वंदे मातरम को नहीं अपनाया है और भविष्य में भी उसका रुख नहीं बदलेगा, लेकिन सरकार होने के नाते कानूनी दायित्वों का पालन करना आवश्यक है।
उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, "क्या कांग्रेस चाहती है कि इस मुद्दे पर कश्मीरियों को जेल में डाल दिया जाए?"
--आईएएनएस
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