वंदे मातरम गीत को आधा-पूरा बांटने का कोई औचित्य नहीं: डॉ. माया टंडन
जयपुर, 20 अगस्त (आईएएनएस)। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. माया टंडन ने वंदे मातरम गीत को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देशवासियों को वंदे मातरम के प्रति उसी सम्मान और भाव को बनाए रखना चाहिए, जो आजादी के दौर से लेकर अब तक लोगों के मन में रहा है। उन्होंने गीत को आधा या पूरा गाए जाने को लेकर चल रही बहस पर कहा कि इसे बांटने का कोई औचित्य नहीं है और इसे जिस स्वरूप में स्वीकार किया गया है, उसी तरह सम्मान के साथ अपनाया जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में डॉ. माया टंडन ने कहा कि बचपन से ही देशवासियों के लिए वंदे मातरम का विशेष महत्व रहा है। मैंने जब से होश संभाला है, तब से इस गीत के प्रति लोगों में सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव देखा है। भारत देश हमारा है और वंदे मातरम जिस सम्मान के साथ गाया जाता है, उसके प्रति उनके मन में भी गहरी श्रद्धा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वंदे मातरम को आधा या पूरा करने की बहस में पड़ने के बजाय इसे जिस रूप में है, उसी रूप में सम्मान देना चाहिए।
डॉ. टंडन ने कहा कि गीत को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की चर्चा उन्हें उचित नहीं लगती। उनका मानना है कि देश के सम्मान से जुड़े प्रतीकों के प्रति लोगों को एकजुट भाव रखना चाहिए। इसको आधा-पूरा बांटने का कोई सेंस नहीं है, इसको जैसा है, वैसा ही हमको अपनाना चाहिए।”
वंदे मातरम को लेकर आ रही प्रतिक्रियाओं पर डॉ. माया टंडन ने कहा कि इस विवाद को लेकर लोग अपने-अपने हिसाब से बातें कर रहे हैं। उन्होंने ऐसी चर्चाएं भी सुनी हैं, जिनमें दक्षिण भारत के कुछ लोगों की ओर से गीत के कुछ हिस्से को लेकर अलग राय सामने रखी जा रही है। कांग्रेस की ओर से भी इस मुद्दे पर विरोध की बात कही जा रही है। जो लोग भारतीय हैं, उन्हें अपने देश का सम्मान करना चाहिए और राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों पर अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई इसका अपमान करता है तो उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।
--आईएएनएस
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