वंदे मातरम बिल पर महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव का समर्थन, राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर सख्त कार्रवाई की मांग
हरिद्वार, 20 जुलाई (आईएएनएस)। प्रस्तावित वंदे मातरम बिल को लेकर धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। हरिद्वार में नया उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने इस बिल का स्वागत करते हुए इसे देशहित में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल काफी पहले हो जानी चाहिए थी और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने चाहिए।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "वंदे मातरम से जुड़ा प्रस्तावित कानून एक अच्छा कदम है, भले ही इसमें देरी हुई हो। देश की आजादी के समय ही इस तरह के प्रावधान लागू किए जाने चाहिए थे। यह देश और समाज के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण निर्णय है।"
उन्होंने कहा, "वंदे मातरम केवल एक नारा नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना का प्रतीक है। जो व्यक्ति अपनी जन्मभूमि और देश के प्रति सम्मान की भावना खो देता है, उसके लिए यह चिंता का विषय है। देश के प्रति आभार और सम्मान की भावना प्रत्येक नागरिक में होनी चाहिए।"
महामंडलेश्वर ने केंद्र सरकार से मांग की कि वंदे मातरम और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े मामलों में और कड़े प्रावधान किए जाएं। उन्होंने कहा, "जो लोग देश के सम्मान से जुड़े प्रतीकों का अनादर करते हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए। मैं लंबे समय से विभिन्न मंचों और चर्चाओं में देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। सरकार को ऐसे मामलों में सख्ती दिखानी चाहिए, ताकि देश के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो सके।"
करौली शंकर महादेव ने यह भी कहा कि देश की धरती, संस्कृति और संसाधनों के प्रति नागरिकों में कृतज्ञता की भावना जरूरी है। जिस देश में व्यक्ति जन्म लेता है, रहता है और जहां से उसे जीवनयापन के साधन मिलते हैं, उसके प्रति सम्मान व्यक्त करना नागरिकों का कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और देश के सम्मान को बनाए रखने के लिए समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना जरूरी है। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वंदे मातरम से जुड़े प्रस्तावित कानून में ऐसे प्रावधान शामिल किए जाएं, जिससे राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
--आईएएनएस
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