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वन विभाग से पौधे चाहिए तो सिर्फ एक कॉल करें और लिंक मिलते ही सभी नर्सरियों की जानकारियां मिल जाएंगी

वन विभाग से पौधे चाहिए तो सिर्फ एक कॉल करें और लिंक मिलते ही सभी नर्सरियों की जानकारियां मिल जाएंगी
वन विभाग से पौधे चाहिए तो सिर्फ एक कॉल करें और लिंक मिलते ही सभी नर्सरियों की जानकारियां मिल जाएंगी

गांधीनगर, 9 जुलाई (आईएएनएस)। आप पौधे लगाना चाहते हैं, लेकिन गुजरात वन विभाग की निकटस्थ नर्सरी खोजने में कठिनाई हो रही है? तो अब इसका एक आसान उपाय है। बस, 8320002000 मोबाइल नंबर पर डायल करें। यह कॉल अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाएगी, और आपके मोबाइल फोन पर एक लिंक के साथ एसएमएस आएगा। इस लिंक को खोलने पर आपके क्षेत्र के वन विभाग के सामाजिक वनीकरण विभाग की नर्सरी की संपर्क जानकारी, गूगल मैप पर उसका स्थान तथा संबंधित वन अधिकारियों के मोबाइल नंबर सहित सारी जानकारी मिल जाएगी। इस व्यवस्था के कारण लोगों को वन विभाग की नर्सरियों से पौधे प्राप्त करने में सरलता रहेगी।

इसके अलावा, यदि आप 8320002000 पर ‘एचआई’ लिखकर एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश भेजेंगे तो भी आपको एक वेब लिंक वाला एसएमएस मिलेगा। इस लिंक पर क्लिक करने से एक मेन्यू खुलेगा, जिसमें गुजरात वन विभाग की सभी नर्सरियों, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर्स (आरएफओ), इको-टूरिज्म साइट्स तथा वन से संबंधित अन्य सेवाओं की संपर्क जानकारी सहित अनेक विकल्प मिलेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन भागीदारी द्वारा देश के ग्रीन कवर का विस्तार बढ़ाने के लिए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान शुरू किया है और गुजरात ने उनके इस आह्वान को स्वीकार कर लिया है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, “मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में समग्र गुजरात को अधिक हरित बनाने के अभियान में हजारों लोग जुड़ें और वृक्षारोपण के लिए नागरिकों को उनके आसपास की वन विभाग की नर्सरियों से पौधे आसानी से मिल सकें। इसके लिए सुंदर व्यवस्था की गई है। इस वर्ष वन विभाग की सामाजिक वनीकरण विंग द्वारा 11.80 करोड़ पौधे नागरिकों में वितरण के लिए तैयार किए गए हैं।”

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा, “वन विभाग की इस नागरिक-केंद्रित पहल के अंतर्गत गुजरात वन विभाग ने एक इन-हाउस डिजिटल हेल्पलाइन सिस्टम शुरू किया है, जो राज्यभर के लोगों को सहायता तथा शिकायतों के निवारण के लिए उचित वन अधिकारियों से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रहा है।”

वन विभाग की इस डिजिटल सेवा को जनता से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, और विभाग को प्रतिदिन लगभग 30 से 40 कॉल प्राप्त हो रहे हैं। एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (रिसर्च एंड ट्रेनिंग) एसके श्रीवास्तव ने कहा, “इस पहल की मुख्य विशेषता इसका डायनेमिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इस प्लेटफॉर्म को आवश्यकताओं के अनुसार तेजी से बदला और अपडेट किया जा सकता है।”

आरके सुगूर, प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (सोशल फॉरेस्ट्री), ने कहा, “नागरिक वन विभाग की किसी भी नर्सरी से पौधों के आकार के आधार पर 5 से 15 रुपए तक की मामूली कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधे खरीद सकते हैं। समग्र राज्य में वन विभाग की कुल 453 नर्सरियां स्थित हैं। 15×25 सेंटीमीटर या 10×20 सेंटीमीटर आकार की पॉलीबैग में लगाए गए पौधों का निःशुल्क वितरण किया जाता है। जो नागरिक निःशुल्क या रियायती दर पर पौधे प्राप्त करना चाहते हैं, वे अपने जिले के संबंधित रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) अथवा डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (डीसीएफ) से संपर्क कर सकते हैं।”

वन विभाग से संबंधित कोई शिकायत हो या अधिक सहायता की आवश्यकता हो; ऐसे मामलों में नागरिक वन विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1926 पर संपर्क कर सकते हैं। इस हेल्पलाइन पर भी प्रतिदिन लगभग 30 से 40 कॉल प्राप्त होते हैं।

यह संपूर्ण सिस्टम वन विभाग द्वारा इन-हाउस (स्वयं के तरीके से) विकसित किया गया है और इसका संचालन भी वही कर रहा है। यह बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार करने के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग पर विभाग के जोर को दर्शाता है। यह पहल वन विभाग से सहायता मांगने वाले नागरिकों के लिए आशीर्वाद समान है।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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