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उत्तराखंड में देश के संविधान और कानून का अपमान हुआ : पूर्व सीएम हरीश रावत

उत्तराखंड में देश के संविधान और कानून का अपमान हुआ : पूर्व सीएम हरीश रावत
उत्तराखंड में देश के संविधान और कानून का अपमान हुआ : पूर्व सीएम हरीश रावत

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रेस वार्ता पर कहा कि जो कुछ भी उत्तराखंड की धरती पर हुआ, उसने देश के संविधान और कानून का अपमान किया है।

राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर प्रेस वार्ता की। उन्होंने दावा किया है कि आज नहीं तो कल कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को न्याय जरूर मिलेगा। एफआईआर भी दर्ज होगी।

नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत के दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि जिस मंच से मल्लिकार्जुन खड़गे भाषण दे रहे हैं, वहां शुद्धिकरण करना अशुद्ध मानसिकता को दर्शाता है। शुद्धिकरण के नाम पर जो कुछ किया गया, वह संविधान का अपमान और कानून का उल्लंघन है। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। इसे उत्तराखंड की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के लोग ऐसी घटनाओं से शर्मिंदा हैं।

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन को लेकर हरीश रावत ने कहा कि किसी विचार से सहमत या असहमत होना अलग बात है, लेकिन किसी संस्थान पर दबाव डालकर किताब के प्रकाशन को रोकना उचित नहीं है। हर व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति के विचारों से असहमत होने का अधिकार है। अगर किसी संस्था पर दबाव डालकर किसी किताब को प्रकाशित होने से रोका जाता है या उसमें बदलाव के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर सवाल है।

कमीडियन समय रैना के शो में बिहार के लोगों को लेकर दिए बयान पर भी हरीश रावत ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी विशेष समुदाय या क्षेत्र के लोगों का मजाक उड़ाना या अपमानजनक तरीके से पेश करना निंदनीय है। कॉमेडी में हास्य और सेंस ऑफ ह्यूमर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए। किसी खास क्षेत्र या समुदाय का अपमान करना उचित नहीं है।

नेपाल में आई बाढ़ को लेकर हरीश रावत ने इसे बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भी वर्ष 2013 में बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर चुका है और कुछ वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश में भी गंभीर आपदा आई थी। हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसके पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण है। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और जब तक जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय नहीं किए जाएंगे, ऐसी त्रासदियां सामने आती रहेंगी।

‘एक देश, एक चुनाव’ पर रावत ने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जहां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग सरकारें और विचारधाराएं हैं। देश की संस्कृति, भाषा और सामाजिक परिस्थितियों में विविधता है, और संघवाद को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। अलग-अलग राज्यों की व्यवस्थाओं पर कोई व्यवस्था थोपने की कोशिश करने से समस्याएं और टकराव बढ़ सकते हैं। भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए यह सब कर रही है।

आरक्षण समाप्त करने की मांग से जुड़े सवाल पर रावत ने कहा कि देश ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था को स्वीकार किया है। सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को आगे लाने के लिए आरक्षण जारी रहना चाहिए। सदियों तक समाज के एक वर्ग को सामाजिक बंधनों और भेदभाव का सामना करना पड़ा तथा उसे संपत्ति और ज्ञान तक पहुंच से वंचित रखा गया। ऐसे समुदायों को मुख्यधारा में लाने और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है।

जब रावत से मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी के विचारों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि किसी भी दौर में लिखे गए ग्रंथ उस समय की सामाजिक व्यवस्था और परिस्थितियों को दर्शाते हैं। महिलाओं के प्रति सम्मान, बराबरी और आदर की भावना जरूरी है। प्राचीन ग्रंथों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ में समझना चाहिए और वर्तमान समाज के मूल्यों के अनुरूप समानता तथा महिला सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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