उत्तराखंड के मॉडल निकाहनामा का मुस्लिम मंच ने किया स्वागत, डॉ. शालिनी अली बोलीं- महिलाओं के अधिकार होंगे मजबूत
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा प्रस्तावित नए मॉडल निकाहनामा फॉर्मेट का राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने स्वागत किया है। मंच की नेशनल कन्वीनर डॉ. शालिनी अली ने कहा कि यह पहल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को मजबूत कर सकती है, खासकर विरासत और शादी से जुड़ी सुरक्षा के मामले में।
डॉ. शालिनी अली ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "शरिया के मुताबिक मुस्लिम महिलाओं का भी अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा होता है। यूसीसी के तहत जो तैयारियां की जा रही हैं, उनका मकसद यह पक्का करना है कि सभी महिलाओं का सम्मान हो। उत्तराखंड में जो मॉडल निकाहनामा तैयार किया जा रहा है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "निकाहनामा एक कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें लड़की अपनी शर्तें भी शामिल कर सकती है। कई लड़कियां ऐसी हैं, जो निकाहनामा पढ़े बिना ही उस पर साइन कर देती हैं, लेकिन निकाहनामा आपकी सुरक्षा के लिए होता है। हर किसी को इसे और मजबूत बनाने का हक है। अगर वहां की सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है और तैयारियां कर रही है तो हम उसका स्वागत करते हैं।"
डॉ. अली ने बताया, "इस मॉडल निकाहनामा को यूसीसी कमेटी के सामने लाया जाएगा, जहां इस पर चर्चा होगी। उलेमाओं से बातचीत के बाद इसे पेश किया जाएगा। इससे आने वाली पीढ़ियों में हमारी जितनी भी बेटियां हैं, उनका पुरजोर तरीके से समर्थन कर हम उन्हें आगे बढ़ने का मौका देंगे और साथ ही उन्हें सुरक्षित भी करेंगे। यह बहुत जरूरी है और आगे चलकर यह मॉड्यूल सभी प्रदेशों में आना चाहिए।"
इसका विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "जो इसे गलत बता रहे हैं, वे मौलाना हैं जो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। इस्लाम में महिलाओं को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है, फिर भी हम देखते हैं कि तीन तलाक के मामले सामने आते हैं और बहन-बेटियों को उनके पिता की संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता, यह दुखद है। ऐसे मौलाना और मौलवियों की बातों को अलग करना चाहिए और सोचना चाहिए कि किस तरह से अपनी बेटियों की जिंदगी को सुरक्षित किया जाए। महिलाओं को अपने निकाहनामे को पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और अपनी शर्तें उसमें जोड़नी चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।"
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