उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले मांबलम नहर की सफाई कराएगा चेन्नई नगर निगम
चेन्नई, 20 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले चेन्नई में बाढ़ रोकने की तैयारियां तेज हो गई हैं। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) मांबलम नहर की जल वहन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है।
निगम 5.7 किलोमीटर लंबी इस नहर की गाद निकालने की योजना बना रहा है। इस काम पर 46.7 लाख रुपए की लागत आएगी। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं और जल्द ही ठेकेदार का चयन किया जाएगा।
इस काम से उन इलाकों को फायदा मिलेगा जो मानसून में बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं, खासकर टी नगर, वेस्ट मांबलम, नंदनम और सैदापेट। नहर इन्हीं इलाकों से होकर गुजरती है।
योजना के तहत नहर में जमी गाद को हटाया जाएगा और कुछ हिस्सों को करीब चार फीट तक गहरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में वेंकटनारायण रोड और सीआईटी नगर में पुलियों के अंदर की रुकावटों को हटाने का काम भी शामिल है, ताकि बारिश के पानी की निकासी बिना रुके हो सके।
एक और अहम काम वाईएमसीए परिसर के पास नहर के मुहाने को चौड़ा करना है, जहां यह अड्यार नदी में गिरती है। निकास को चौड़ा करने से तेज बारिश के दौरान रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में पानी भरने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
गाद निकालने के लिए कई रोबोटिक एक्सकेवेटर लगाए जाएंगे। पहला चरण वल्लुवर कोट्टम के पास से शुरू होगा, जहां लगभग 300 मीटर लंबे हिस्से की सफाई की जाएगी। इस इलाके में नहर सबसे संकरी है, इसकी चौड़ाई केवल तीन मीटर है।
इसके साथ ही बज़ुल्लाह रोड और वेंकटनारायण रोड के पास भी सफाई और चौड़ीकरण का काम किया जाएगा। चेन्नई मेट्रो रेल भी पनागल पार्क-नंदनम अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण क्षेत्र के पास नहर के हिस्से को साफ करने में निगम की मदद करेगी।
नहर के किनारे अभी भी करीब नौ अतिक्रमण बताए जा रहे हैं, जिनमें थियागराया रोड सेक्शन में एक मंदिर का ढांचा भी शामिल है। जीसीसी का तेनामपेट जोन जलमार्ग में बाधा बन रहे ढांचों को हटाने के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।
इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य नहर की क्षमता को मौजूदा 200 क्यूसेक से बढ़ाकर लगभग 500 क्यूसेक करना है। पहले इसकी क्षमता केवल 138 क्यूसेक थी, लेकिन एमजीआर सालई और जीएन चेट्टी रोड के किनारे कुछ अतिक्रमण हटाने के बाद पानी के बहाव में सुधार हुआ था।
यह नया अभियान 'कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल' (सीएजी) की एक अहम रिपोर्ट के बाद शुरू हो रहा है। सीएजी ने चेन्नई के स्मार्ट सिटी प्रोग्राम के तहत नहर के पहले के जीर्णोद्धार में खामियां पाई थीं। 59.4 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद योजना का बड़ा हिस्सा अधूरा रह गया था। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि निगम ने अधूरे प्रोजेक्ट के लिए जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
इसलिए मानसून से पहले शुरू हो रही यह नई सफाई पहल पुरानी कमियों को दूर करने के साथ-साथ बाढ़ रोकथाम के उपायों को भी मजबूत करेगी।
--आईएएनएस
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