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उत्तर प्रदेश: बालवाटिका नवारंभ उत्सव, नन्हें हाथों ने रेत पर लिखी सीख की पहली इबारत

लखनऊ, 25 मार्च (आईएएनएस)। जब नन्हें हाथ रेत पर अक्षरों की पहली रेखा खींचते हैं, तो वह केवल लेखन नहीं, बल्कि एक सशक्त भविष्य की शुरुआत होती है। ‘बालवाटिका नवारंभ उत्सव’ के दौरान अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जब नन्हें बालकों से रेत पर अक्षर और अंक लिखने को कहा, तब नन्हें हाथों ने बिना कोई देर किए उत्साह के साथ सीखने की इस प्रक्रिया को अपनाया।
उत्तर प्रदेश: बालवाटिका नवारंभ उत्सव, नन्हें हाथों ने रेत पर लिखी सीख की पहली इबारत

लखनऊ, 25 मार्च (आईएएनएस)। जब नन्हें हाथ रेत पर अक्षरों की पहली रेखा खींचते हैं, तो वह केवल लेखन नहीं, बल्कि एक सशक्त भविष्य की शुरुआत होती है। ‘बालवाटिका नवारंभ उत्सव’ के दौरान अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जब नन्हें बालकों से रेत पर अक्षर और अंक लिखने को कहा, तब नन्हें हाथों ने बिना कोई देर किए उत्साह के साथ सीखने की इस प्रक्रिया को अपनाया।

किसी ने अक्षरों को लिखकर तो किसी ने अंकों को लिखकर अपनी सीखने की पहली अभिव्यक्ति को जीवंत रूप से उकेरा।

उत्तर प्रदेश में ‘बालवाटिका नवारंभ उत्सव’ के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल का प्रभावी क्रियान्वयन देखने को मिला। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व व मार्गदर्शन में प्रदेश के समस्त बालवाटिका (को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र) युक्त विद्यालयों में यह उत्सव उत्साह और उमंग के साथ आयोजित किया गया।

लखनऊ में सरोजनीनगर ब्लॉक के रामचौरा स्थित प्राथमिक विद्यालय से इसकी औपचारिक शुरुआत जनपद की गई। इस दौरान रेत लेखन, खेल आधारित गतिविधियों और रोचक शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ा गया। विशेष रूप से 3 से 4 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने रेत पर अक्षर लेखन के माध्यम से खेल-खेल में सीखने का अनुभव प्राप्त किया, जिससे उनमें स्वाभाविक जिज्ञासा और सीखने के प्रति रुचि विकसित हुई।

इस दौरान अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि हर माता-पिता यह कोशिश करते हैं कि उनका बच्चा उनसे आगे निकले। इसलिए हमें उनकी भावनाओं के अनुरूप कोशिश करनी होगी। जब आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्त्री, शिक्षक और बच्चे की मां सम्मिलित रूप से प्रयास करेंगे, तब हमें सफलता अवश्य मिलेगी। हमें मिलकर कार्य करना होगा।

उन्‍होंने कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सीखने का चरण है। ‘नवारंभ उत्सव’ का उद्देश्य प्रत्येक बालक-बालिका को प्रारंभिक अवस्था से ही विद्यालय से जोड़ना है, ताकि वे नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण करें और आगे की कक्षाओं में सहज रूप से प्रवेश कर सकें। सरकार की प्राथमिकता 3 वर्ष से 18 वर्ष तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि बच्चों को आकर्षित करने के लिए विद्यालयों में रोचक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे बच्चे स्वयं विद्यालय आने के लिए प्रेरित हों और सीखने की प्रक्रिया को आनंदपूर्वक अपनाएं।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि खेल आधारित शिक्षण, स्व-अधिगम एवं सक्रिय अधिगम की पद्धतियों के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास, जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रारंभिक स्तर से ही सशक्त किया जा रहा है। ‘सेल्फ लर्निंग’ और ‘एक्टिव लर्निंग’ के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता का विकास हो रहा है।

कार्यक्रम के दौरान 58 बच्चों को गिफ्ट हैंपर वितरित किए गए। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्वयं सुफियान, दीपाली, नंदिनी, आर्य विश्वकर्मा एवं इशानी सहित अन्य बच्चों को अपने हाथों से गिफ्ट प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इन गिफ्ट हैंपर्स में स्लेट, चॉक, क्रेयॉन्स, वैक्स कलर, चॉकलेट्स, फ्रूटी, फल एवं स्नैक्स शामिल थे, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम के दौरान नवीन शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए पाठ्यपुस्तक वितरण की औपचारिक शुरुआत भी की गई। इसका शुभारंभ अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा एवं महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस अवसर पर नक्श, शिवांशी, अवंतिका, शिफा एवं आर्य शुक्ला सहित कुल 25 बच्चों को पाठ्यपुस्तकें वितरित की गईं, जिससे उनके शैक्षिक सत्र की सकारात्मक शुरुआत सुनिश्चित हुई।

नवारंभ उत्सव के अंतर्गत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन को बढ़ावा देने के साथ-साथ 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों के कक्षा 1 में प्रवेश को सरल और प्रेरक बनाने पर विशेष बल दिया गया। विद्यालयों में प्रिंट-समृद्ध वातावरण, लर्निंग कॉर्नर और विविध शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस अवसर पर अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता भी देखने को मिली, जिससे बाल शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल सुदृढ़ हुआ। यह उत्सव न केवल बच्चों के शैक्षिक जीवन की सशक्त शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि विद्यालय और समुदाय के बीच समन्वय को भी नई दिशा प्रदान कर रहा है।

--आईएएनएस

विकेटी/एएसएच

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