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उत्तर प्रदेश: बागपत में 5000 टीसीडी क्षमता की नई सहकारी चीनी मिल को मंजूरी

लखनऊ, 6 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया है। बागपत में 5000 टीसीडी क्षमता की नई सहकारी चीनी मिल को मंजूरी मिल गई है।
उत्तर प्रदेश: बागपत में 5000 टीसीडी क्षमता की नई सहकारी चीनी मिल को मंजूरी

लखनऊ, 6 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया है। बागपत में 5000 टीसीडी क्षमता की नई सहकारी चीनी मिल को मंजूरी मिल गई है।

प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में प्रायोजन रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग (पीआईबी सचिवालय), नियोजन विभाग की 101वीं बैठक में किसान सहकारी चीनी मिल, बागपत की पेराई क्षमता को 2500 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 5000 टन प्रतिदिन (टीसीडी) करने तथा नवीनतम तकनीक पर आधारित रिफाइन्ड शुगर उत्पादन हेतु नई चीनी मिल स्थापित करने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

बैठक में बताया गया कि इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 40,702.57 लाख रुपए (लगभग 407 करोड़ रुपए) है। परियोजना का वित्त पोषण 50 प्रतिशत राज्य सरकार की अंश पूंजी और शेष 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा ऋण के रूप में किया जाएगा। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 10,000 लाख रुपये (100 करोड़ रुपये) के ऋण प्रावधान के लिए शीघ्र प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नई चीनी मिल की स्थापना का प्रमुख आधार कमांड एरिया में गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता है। आकलन के अनुसार अगले पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख टन गन्ना पेराई के लिए उपलब्ध रहेगा। वर्तमान में मिल की मशीनरी 30 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी है, जिससे स्टीम और बैगास की अधिक खपत हो रही है।

पेराई सत्र 2024-25 के दौरान मिल द्वारा 4.49 लाख टन गन्ने की पेराई की गई थी, जबकि शेष गन्ना निजी क्षेत्र की चीनी मिलों को गया। नई मिल में आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे संचालन क्षमता और ऊर्जा दक्षता में सुधार होगा।

अधिकारियों के अनुसार, 5000 टीसीडी क्षमता की पेराई औसतन 22 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे पेराई सत्र की अवधि कम होगी और किसानों के गन्ने की समय पर पेराई सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे गन्ना मूल्य भुगतान में भी सुगमता आएगी। परियोजना के अंतर्गत 100 टीपीएच, 67 बार हाई प्रेशर बॉयलर, 10 मेगावाट पावर टरबाइन और एसीवीएफडी (वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव) मोटरों का उपयोग किया जाएगा। इससे स्टीम खपत में कमी आएगी, ऊर्जा की बचत होगी और बैगास की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

अधिकारियों ने बताया कि रिफाइंड शुगर उत्पादन से चीनी की गुणवत्ता में सुधार होगा और बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर बिक्री संभव हो सकेगी। डीसीएस आधारित ऑटोमेशन प्रणाली के माध्यम से सल्फर युक्त चीनी के स्थान पर रिफाइंड शुगर का उत्पादन किया जाएगा, जिससे चीनी हानियों पर नियंत्रण और उत्पादन लागत में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे, किसानों की आय में वृद्धि होगी और राज्य के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के समग्र विकास को बल मिलेगा।

--आईएएनएस

विकेटी/एएसएच

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