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उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के खुलासे पर यूक्रेन से नाराज दक्षिण कोरिया, राजदूत वापस लौटे

उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के खुलासे पर यूक्रेन से नाराज दक्षिण कोरिया, राजदूत वापस लौटे
उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के खुलासे पर यूक्रेन से नाराज दक्षिण कोरिया, राजदूत वापस लौटे

सोल, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूक्रेन में तैनात दक्षिण कोरिया के राजदूत पार्क की-चांग शनिवार को स्वदेश लौट आए। यूक्रेन द्वारा दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजे जाने की जानकारी सार्वजनिक किए जाने को लेकर दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद गहरा गया है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की।

योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन के इस कदम के विरोध में अपने राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया था। राजदूत पार्क की वापसी विदेश मंत्रालय द्वारा इस फैसले की घोषणा किए जाने के दो दिन बाद हुई है। हालांकि, सोल ने स्पष्ट किया है कि वह विवाद को सुलझाने के लिए यूक्रेन के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है।

विवाद की शुरुआत तब हुई, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजे जाने का खुलासा किया। दक्षिण कोरिया का कहना है कि दोनों देशों के बीच इस मामले को गोपनीय रखने पर सहमति बनी थी।

दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों उत्तर कोरियाई सैनिकों को जनवरी 2025 में रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लड़ाई के दौरान यूक्रेनी बलों ने पकड़ लिया था। वे रूस की ओर से युद्ध में शामिल थे। दोनों सैनिक सितंबर 2026 के मध्य में दक्षिण कोरिया पहुंचे।

सोल का दावा है कि सैनिकों और उत्तर कोरिया में रह रहे उनके परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का फैसला किया गया था। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के मुताबिक, इस मामले को गोपनीय रखने का अनुरोध शुरुआत में यूक्रेन की ओर से ही किया गया था।

हालांकि, यूक्रेन ने ऐसी किसी गोपनीयता संबंधी सहमति से इनकार किया है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़े हैं। दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से आधिकारिक स्पष्टीकरण और माफी की मांग की है।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने 6 अक्टूबर को कहा था कि उन्हें यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा की ओर से माफी वाला संदेश मिला है, लेकिन वह सोल की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इसके बाद दक्षिण कोरियाई सरकार ने कड़े कदम उठाने की बात कही थी।

राजदूत को वापस बुलाना दक्षिण कोरिया की ओर से विरोध जताने का एक दुर्लभ राजनयिक कदम है। इससे पहले दक्षिण कोरिया ने 2008 में जापान के साथ विवाद के दौरान अपने राजदूत को वापस बुलाया था।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच विभिन्न मुद्दों का सौहार्दपूर्ण समाधान चाहता है और इसके लिए यूक्रेन के साथ परामर्श जारी रखेगा।

इस विवाद के बावजूद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं की गई है।

--आईएएनएस

केआर/

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