उत्तम नगर हत्याकांड: कांग्रेस सांसद जावेद का आरोप- 'लोगों को मिल रहीं खुली धमकियां', लिखा अमित शाह को पत्र
नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली के उत्तम नगर हत्याकांड के बाद बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने आरोप लगाए हैं कि विशेष समुदाय के लोगों को खुली धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखते हुए तुरंत संज्ञान लेने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हुई किसी भी चूक के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने अपने पत्र में लिखा, "मैं दिल्ली के उत्तम नगर में हो रहे परेशान करने वाले घटनाक्रमों के संबंध में गहरी चिंता और तत्परता की भावना के साथ यह पत्र लिख रहा हूं, जहां मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को खुली धमकियों, डराने-धमकाने और उनके दैनिक जीवन में डर पैदा करने के एक सुनियोजित प्रयास का सामना करना पड़ रहा है।"
उन्होंने आगे लिखा, "जो कुछ सामने आ रहा है, वह सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि यह लक्षित शत्रुता का एक ऐसा सिलसिला है जो सभी नागरिकों को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करने की राज्य की क्षमता और इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सार्वजनिक धमकियों, भड़काऊ नारों और नफरत से भरी सामग्री के प्रसार ने एक ऐसा माहौल बना दिया है, जहां भारतीय नागरिकों का एक वर्ग देश की राजधानी में ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।"
मोहम्मद जावेद ने अपने पत्र में लिखा, "भारत का संविधान नागरिकता की शर्त के रूप में 'डर' को स्वीकार नहीं करता। संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 23 समानता, स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की गारंटी देते हैं, लेकिन ऐसे अधिकार आज उत्तम नगर में खतरे में नजर आ रहे हैं।"
गृह मंत्री अमित शाह से मांग करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, "इस स्थिति का तत्काल संज्ञान लें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हुई किसी भी चूक के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस को निर्देश दें कि वे नफरत फैलाने वालों, धमकियां देने वालों या स्थिति को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्ती और निष्पक्षता से कार्रवाई करें।
सांसद मोहम्मद जावेद ने मांग की कि कमजोर और संवेदनशील निवासियों के लिए स्पष्ट और प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जमीनी स्तर पर उनका भरोसा बहाल हो सके। इसके साथ ही, पुलिस की कार्रवाई की एक स्वतंत्र समीक्षा शुरू की जाए, ताकि पक्षपात या निष्क्रियता से जुड़ी चिंताओं का समाधान किया जा सके।
--आईएएनएस
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