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ऊर्जा संकट और वैश्विक तनाव के बीच चीन को रणनीतिक बढ़त: अशोक कांथा

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन में भारत के पूर्व राजदूत अशोक के. कांथा ने मौजूदा वैश्विक हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन को कई स्तरों पर स्पष्ट लाभ मिला है।
ऊर्जा संकट और वैश्विक तनाव के बीच चीन को रणनीतिक बढ़त: अशोक कांथा

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन में भारत के पूर्व राजदूत अशोक के. कांथा ने मौजूदा वैश्विक हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन को कई स्तरों पर स्पष्ट लाभ मिला है।

पूर्व राजदूत अशोक के. कांथा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए चीन अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक तैयार था।

कांथा के अनुसार, चीन ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध स्रोतों से जोड़ने, नवीकरणीय ऊर्जा में बड़े पैमाने पर निवेश करने और व्यापक विद्युतीकरण कार्यक्रम चलाने के कारण यह बढ़त हासिल की है।

मुद्रा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चीनी युआन एक महत्वपूर्ण गैर-पश्चिमी मुद्रा के रूप में उभरा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे पेट्रोडॉलर व्यवस्था के अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन वैश्विक वित्तीय संतुलन में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव पर कांथा ने कहा कि दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की सहमति एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह केवल एक प्रारंभिक कदम है।

उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान लंबित मुद्दों पर बातचीत होगी और यदि प्रगति होती है, तो युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है। कांथा ने यह भी जोड़ा कि इतने जटिल मुद्दों का समाधान अल्प समय में संभव नहीं है।

ईरान की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारी नुकसान के बावजूद ईरान ने यह दिखाया है कि एक अपेक्षाकृत कमज़ोर देश भी शक्तिशाली देशों को चुनौती दे सकता है। उन्होंने ‘असममित युद्ध’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान ने रणनीतिक रूप से अपनी स्थिति बनाए रखी है और उसके तेल निर्यात में भी बाधा नहीं आई है।

पूर्व राजदूत अशोक के. कांथा ने कहा, "आपको यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि इस चरण पर अगले दो हफ्तों में तनाव कम करने को लेकर एक सीमित सहमति बनी है और इस दौरान जो भी मुद्दे अभी तक हल नहीं हुए हैं, उन पर चर्चा की जाएगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 14 दिनों की इस समय-सीमा को आगे बढ़ाया जाएगा क्योंकि जाहिर है, ये सभी मुद्दे एक तरफ अमेरिका व इजरायल और दूसरी तरफ ईरान की आपसी संतुष्टि के अनुसार इतनी जल्दी हल नहीं हो सकते।"

कांथा ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में हर देश अपने नागरिकों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को मज़बूत दिखाने की कोशिश कर रहा है लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल और बहुस्तरीय है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

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