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उपराष्ट्रपति ने युवाओं में सेवा भाव और कर्तव्य बोध की भावना को सशक्त बनाने का आह्वान किया

उपराष्ट्रपति ने युवाओं में सेवा भाव और कर्तव्य बोध की भावना को सशक्त बनाने का आह्वान किया
उपराष्ट्रपति ने युवाओं में सेवा भाव और कर्तव्य बोध की भावना को सशक्त बनाने का आह्वान किया

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में मुख्य अतिथि के रूप में 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 में भाग लिया और समाज की अनुकरणीय एवं निःस्वार्थ सेवा के लिए सम्मानित व्यक्तियों तथा संगठनों को संत ईश्वर सेवा सम्मान प्रदान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संत ईश्वर सम्मान निःस्वार्थ सेवा की भावना की स्वीकृति है और भारत की करुणा तथा उत्तरदायित्व की संस्कृति का उत्सव है। उन्होंने राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए सभी पुरस्कार विजेताओं को शुभकामनाएं और बधाई दीं।

सीपी राधाकृष्णन ने इन पुरस्कारों को शुरू करने तथा इस पहल को लगातार 11 वर्षों तक बनाए रखने के लिए संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज को सशक्त बनाने और राष्ट्र को अधिक समावेशी बनाने के लिए मौन रूप से कार्य करने वाले अनगिनत व्यक्तियों को सम्मानित करके, ये पुरस्कार दूसरों को भी सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

सेवा की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सभ्यतागत लोकाचार एवं संस्कृति ने हमेशा सिखाया है, "नर सेवा ही नारायण सेवा है"।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के महान संतों और विचारकों ने लोगों को स्वार्थ की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर दूसरों के कल्याण के लिए खुद को समर्पित करने की प्रेरणा दी है।

'विकसित भारत' के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि, इंफ्रास्ट्रक्चर या तकनीकी प्रगति के माध्यम से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहा कि एक सही अर्थों में विकसित भारत वह है जहां प्रत्येक नागरिक गरिमा, अवसर और आशा का अनुभव करे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक नागरिक एक स्टेकहोल्डर है और सेवा संगठनों तथा व्यक्तियों का कार्य जमीनी स्तर पर राष्ट्र निर्माण का निर्माण करता है। स्वच्छ भारत मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल ने यह साबित कर दिखाया कि किस प्रकार 'जन भागीदारी' एक सरकारी कार्यक्रम को एक जन आंदोलन में बदल सकती है।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए नशीले पदार्थों तथा मादक द्रव्यों के सेवन से पैदा होने वाले गंभीर खतरे पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्मरण कराया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष अगस्त में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान की शुरुआत की थी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप लॉन्च किया था। उन्होंने कहा कि दोनों पहलें नशा मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

अपने संबोधन का समापन करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने विकास के साथ-साथ करुणा, चरित्र और सामाजिक उत्तरदायित्व पर बल दिया तथा सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनका जीवन अधिक से अधिक नागरिकों, विशेषकर युवाओं को समाज के कल्याण के लिए खुद को समर्पित करने और सेवा भाव तथा कर्तव्य बोध की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगा।

--आईएएनएस

एमएस/

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