उपराष्ट्रपति ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा
नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में मनाए जाने वाले अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर श्री विजयपुरम के ध्वज बिंदु पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा किया।
भारत के उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दौरे के तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा कि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा किया। उन्होंने ऐतिहासिक जगहों का दौरा किया, जिसमें वह इमारत भी शामिल है जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस दिसंबर 1943 में अंडमान द्वीप समूह की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान रुके थे। उन्होंने चर्च, सैनिकों की बैरक, गन पॉइंट एरिया और स्मृतिका संग्रहालय का भी दौरा किया, जहां उन्हें द्वीप के समृद्ध इतिहास और इसके भविष्य के विकास की प्रस्तावित योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
इससे पहले उन्होंने डीबीआरएटी सभागार में वंदे मातरम के अवसर पर आयोजित राजकीय समारोह और तिरंगा संगीत कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान को शुरू करने के लिए इन ऐतिहासिक द्वीपों से अधिक उपयुक्त स्थान अन्य कोई और नहीं हो सकता, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम और तिरंगे के इतिहास से गहराई से जुड़े हुए हैं।
महान तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती के अमर शब्दों को याद करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारती द्वारा मनाया जाने वाला ‘मणि कोडी’ उत्सव भारतीय भावना के शाश्वत साहस और भारत माता के ध्वज की महिमा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान इस भावना को आगे बढ़ाते हुए सभी नागरिकों को एक राष्ट्रीय ध्वज, एक मातृभूमि और एक साझा भविष्य के अंतर्गत एकजुट करता है।
भीषण काला पानी का सामना करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत का सिर्फ एक भौगोलिक हिस्सा नहीं है। यह बलिदानों की एक पवित्र भूमि है। उन्होंने वीर विनायक दामोदर सावरकर और सेलुलर जेल में कष्ट सहने वाले अनगिनत अन्य देशभक्तों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस, देशभक्ति और बलिदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि 8 अगस्त, 1942 को महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान ने लाखों भारतीयों को जागृत किया और स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक गति प्रदान की। उन्होंने तिरंगे के इतिहास में द्वीपों के अनूठे स्थान पर भी प्रकाश डाला और याद दिलाया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर, 1943 को यहीं पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक ऐतिहासिक क्षण था।
--आईएएनएस
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