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उपराष्ट्रपति 28 मार्च को झारखंड को दौरे पर, बिरसा मुंडा के वंशजों से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 28 मार्च को झारखंड को दौरे पर रहेंगे। उपराष्ट्रपति का पद संभालने के बाद सी.पी. राधाकृष्णन पहली बार झारखंड के दौरे पर जाने वाले हैं। वे खूंटी जिले के उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि जाएंगे, जहां वे उन्हें श्रद्धांजलि देंगे और उनके वंशजों से बातचीत करेंगे।
उपराष्ट्रपति 28 मार्च को झारखंड को दौरे पर, बिरसा मुंडा के वंशजों से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 28 मार्च को झारखंड को दौरे पर रहेंगे। उपराष्ट्रपति का पद संभालने के बाद सी.पी. राधाकृष्णन पहली बार झारखंड के दौरे पर जाने वाले हैं। वे खूंटी जिले के उलिहातु गांव में भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि जाएंगे, जहां वे उन्हें श्रद्धांजलि देंगे और उनके वंशजों से बातचीत करेंगे।

इसके बाद उपराष्ट्रपति आईआईएम रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। समारोह में कुल 558 डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।

दीक्षांत समारोह का पहला सत्र दोपहर 3 बजे शुरू होगा। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, झारखंड राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौजूद रहेंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। खूंटी और रांची में कुल 22 पुलिस अधिकारी विशेष तैनाती पर हैं। जिला प्रशासन ने भी उच्चस्तरीय सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की तैयारी की है।

उपराष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के इंतजामों को पुख्ता करने के लिए कई जिलों से वरीय डीएसपी और डीएसपी स्तर के 22 पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति खूंटी और रांची जिले में की गई। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की ओर से आदेश जारी कर दिया गया।

खूंटी और रांची में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही कई इलाकों को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। ड्रोन आदि पर प्रतिबंध है। उनका यह दौरा झारखंड की आदिवासी संस्कृति और बिरसा मुंडा की विरासत के प्रति सम्मान दर्शाता है।

भगवान बिरसा मुंडा जनजाति के महान लोकनायक, धार्मिक सुधारक, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, जमींदारों, ठेकेदारों और मिशनरियों के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट किया। उनका छोटा, लेकिन प्रभावशाली जीवन आदिवासी गौरव और संघर्ष का प्रतीक बन गया। उन्होंने आदिवासी समाज को न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ खड़ा किया, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान बचाने का रास्ता भी दिखाया।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी

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