Samachar Nama
×

यूपी: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम को शामिल करने की तैयारी, दानिश आजाद अंसारी और सीमा द्विवेदी ने विपक्ष को घेरा

यूपी: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम को शामिल करने की तैयारी, दानिश आजाद अंसारी और सीमा द्विवेदी ने विपक्ष को घेरा
यूपी: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम को शामिल करने की तैयारी, दानिश आजाद अंसारी और सीमा द्विवेदी ने विपक्ष को घेरा

लखनऊ, 9 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की तैयारियों के बीच वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी और भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी ने वक्फ संशोधन अधिनियम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाना, अवैध कब्जों पर रोक लगाना और मुस्लिम समाज के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दोनों नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद वक्फ संपत्तियों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इन दलों के शासनकाल में वक्फ की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ और वक्फ माफिया को बढ़ावा मिला। यूपी में वक्फ की सबसे अधिक संपत्तियों पर कब्जे समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हुए और गरीब मुसलमानों के विकास के लिए वक्फ संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं किया गया। पिछली सरकारों ने निजी हितों के लिए वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग होने दिया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया वक्फ संशोधन अधिनियम वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, उचित दस्तावेजीकरण, नियमित ऑडिट और अवैध कब्जों पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया है। समय के साथ वक्फ बोर्ड अपने मूल उद्देश्य से भटक गया था और कुछ लोगों के नियंत्रण में आ गया था, जिससे वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग होने लगा। संसद में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा हुई और इसके बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया गया। इसके बाद, समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर सुझाव लिए और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर वक्फ बोर्ड के गठन के लिए नई रूपरेखा तैयार की गई।

मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत प्रस्तावित 11 सदस्यीय वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व, पसमांदा समाज की भागीदारी, विधि विशेषज्ञों की मौजूदगी और एक गैर-मुस्लिम सदस्य को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नया बोर्ड गठित किया जाना प्रस्तावित है। नया बोर्ड केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही गठित किया जाएगा।

भाजपा सांसद सीमा द्विवेदी ने भी वक्फ संशोधन कानून का समर्थन करते हुए कहा कि संसद में इस विधेयक पर विपक्ष ने व्यापक विरोध किया था। उनका आरोप था कि पुराने कानून का लाभ उठाकर वक्फ बोर्ड के नाम पर बड़ी मात्रा में भूमि पर कब्जे किए गए और उसकी जवाबदेही सुनिश्चित नहीं थी।

उन्होंने कहा कि पहले यदि किसी व्यक्ति का वक्फ बोर्ड से विवाद होता था, तो उसे उसी व्यवस्था के भीतर न्याय की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। संशोधित कानून के बाद व्यवस्था में बदलाव किया गया है और बोर्ड के गठन में विविध प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, नए वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम सदस्य ही नहीं होंगे, बल्कि अन्य सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

कांग्रेस द्वारा संशोधित कानून को अदालत में चुनौती देने की बात पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को न्यायालय जाने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति लोगों को न्याय दिलाने के बजाय उन्हें लंबे समय तक विवादों में उलझाए रखने की रही है।

--आईएएनएस

पीएसके

Share this story

Tags