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यूपी : परिवारवाद के आरोपों के बीच मायावती का दांव, ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया

यूपी : परिवारवाद के आरोपों के बीच मायावती का दांव, ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया
यूपी : परिवारवाद के आरोपों के बीच मायावती का दांव, ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया

लखनऊ, 23 सितंबर (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उत्तर प्रदेश समेत आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अकेले दम पर मैदान में उतरने का फैसला दोहराते हुए संगठन और चुनावी तैयारियों को तेज करने का ऐलान किया है। बसपा प्रमुख मायावती ने बुधवार को लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय बैठक में कार्यकर्ताओं को चुनावी जीत के लिए पूरी ताकत झोंकने का निर्देश दिया। इसी बैठक में उनके भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई।

मायावती ने कहा कि आगामी चुनाव चाहे सीधे संघर्ष के हों, त्रिकोणीय हों या चतुष्कोणीय, बसपा को उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार और पूर्ण बहुमत के साथ दूसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य पर केंद्रित रहना है। उन्होंने यूपी के साथ उत्तराखंड और पंजाब में भी पार्टी को अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारियों, मजबूत उम्मीदवारों के चयन और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने के निर्देश दिए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां को सत्ता की 'मास्टर चाबी' हासिल करने की राह में पार्टी के सामने सभी विरोधी दलों की ओर से चुनौतियां हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मोह-माया, रिश्ते-नाते और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर सिर्फ सरकार बनाने के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। परिवारवाद के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि बसपा इससे हमेशा अलग रही है। उन्होंने पार्टी संस्थापक कांशीराम के उस सिद्धांत का उल्लेख किया कि पूरा बहुजन समाज ही उनका परिवार था।

मायावती ने कहा कि रिश्तेदार संगठन में काम करना चाहें तो बिना किसी लोभ के कर सकते हैं, लेकिन पार्टी में जिम्मेदारी व्यक्तिगत पारिवारिक हित के आधार पर नहीं होनी चाहिए। बसपा प्रमुख ने बैठक में मिले फीडबैक के हवाले से भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत देश में गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन, पलायन और भ्रष्टाचार से जनता परेशान है और आम लोगों के लिए 'अच्छे दिन' की उम्मीद निराशा में बदल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के संकीर्ण, सामंती और जातिवादी रवैये के साथ-साथ धार्मिक आस्था से जुड़े विवादों तथा ब्राह्मण समाज में उपेक्षा और असुरक्षा की भावना के कारण पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है।

पूर्व सीएम मायावती ने कहा कि बहुजन समाज की सबसे बड़ी ताकत संविधान से मिला वोट का अधिकार है। उनके मुताबिक इसी राजनीतिक शक्ति के आधार पर दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम और अन्य वंचित वर्ग अपनी तकदीर और देश की तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकारों के अनुभव इस राजनीतिक शक्ति का प्रमाण हैं। उन्होंने जीएसटी, यूपीआई भुगतान व्यवस्था और आर्थिक विकास के मुद्दे भी उठाए। मायावती ने कहा कि जीडीपी की वृद्धि का वास्तविक लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है, इसलिए केवल 'विकसित भारत' के बजाय 'शक्तिशाली भारत' की दिशा में सोचने की जरूरत है।

उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों का हवाला देते हुए सामाजिक और संस्थागत भेदभाव पर भी सवाल उठाए। बैठक का सबसे अहम राजनीतिक फैसला ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने का रहा। वकालत की पढ़ाई पूरी कर चुके ईशान आनंद ने नई जिम्मेदारी के लिए मायावती का आभार जताते हुए कहा कि वह पार्टी और बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करेंगे।

ईशान आनंद ने कहा कि वह मायावती के निर्देशों और बताए रास्ते पर चलते हुए पार्टी के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने डॉ. आंबेडकर और कांशीराम को नमन करते हुए कहा कि बहुजन समाज को अपने पैरों पर खड़ा करने के उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। ईशान को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दिए जाने का फैसला ऐसे समय हुआ है जब बसपा संगठन में हाल के दिनों में बड़े बदलाव हुए हैं। मायावती ने इससे पहले आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से अलग किया था और ईशान को संगठन में नई जिम्मेदारी देने के संकेत दिए थे।

--आईएएनएस

विकेटी/एसके

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