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यूपी में 'महा दंगल', मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त

लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में रविवार को भारत की समृद्ध कुश्ती परंपरा का जश्न मनाते हुए एक भव्य महा दंगल का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न जिलों से आए प्रतिभाशाली पहलवानों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में ताकत, अनुशासन और परंपरा का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।
यूपी में 'महा दंगल', मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त

लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में रविवार को भारत की समृद्ध कुश्ती परंपरा का जश्न मनाते हुए एक भव्य महा दंगल का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न जिलों से आए प्रतिभाशाली पहलवानों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में ताकत, अनुशासन और परंपरा का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त शामिल हुए, जो पद्मश्री, खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं। उनकी मौजूदगी ने युवा और अनुभवी दोनों तरह के पहलवानों को प्रेरित किया।

रोमांचक मुकाबलों और समुदाय की शानदार भागीदारी से भरे इस दंगल में आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए थे। इनमें बंपर इनाम के तौर पर एक मोटरसाइकिल, 100 लीटर पारंपरिक 'बिलोना देसी घी' और 1,00,000 रुपए के नकद पुरस्कार शामिल थे। इस आयोजन ने भारत की पारंपरिक कुश्ती शैली की चिरस्थायी लोकप्रियता और उसकी गहरी सांस्कृतिक जड़ों को एक बार फिर उजागर किया।

कुश्ती को मुख्यधारा में वापस लाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल का मकसद उन खिलाड़ियों को सम्मानित करना था, जो अपने समर्पण और लगन से इस सदियों पुराने खेल को आज भी जीवित रखे हुए हैं।

कार्यक्रम के दौरान योगेश्वर दत्त ने इस तरह की पहल का जोरदार समर्थन करते हुए भारत की परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पारंपरिक पोषण पद्धतियां, खासकर देसी गिर गाय के दूध से पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया बिलोना घी, भारत की विरासत के सबसे शुद्ध और पौष्टिक तत्वों में शामिल हैं।

यह आयोजन खेल, संस्कृति और पोषण को एक मंच पर लाकर पारंपरिक भारतीय पद्धतियों को पुनर्जीवित करने की व्यापक सोच को भी दर्शाता है। इस पहल से जुड़े एक सह-संस्थापक ने कहा, "हमारे पहलवान, हमारा घी और हमारी जीवनशैली, ये सभी ऐसी धरोहर हैं, जिन्हें संजोकर रखना और आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।"

महा दंगल एक सशक्त संदेश बनकर उभरा, जिसने भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का मंच प्रदान किया।

--आईएएनएस

आरएसजी

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