यूपी को चार हिस्सों में बांटने की योजना है क्या, भाजपा दे जवाब: इमरान प्रतापगढ़ी
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में बंटवारे को लेकर मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान, बाबा रामदेव की ओर से सामाजिक खाई बढ़ने और गृहयुद्ध की आशंका जताए जाने, दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं को जारी नोटिस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र और भाजपा से उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की, जबकि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
ओम प्रकाश राजभर ने हाल में दावा किया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है और पूर्वांचल अलग राज्य बनने पर राजभर समाज का व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है। इस पर इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि ओपी राजभर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के करीबी व्यक्ति हैं। ऐसे में यदि उत्तर प्रदेश सरकार का एक कैबिनेट मंत्री यह कह रहा है कि प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की योजना है, तो इस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। क्या गृह मंत्रालय या केंद्र सरकार के स्तर पर उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर कोई योजना चल रही है? भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या सरकार उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की दिशा में कोई योजना बना रही है या राजभर का बयान उनका निजी राजनीतिक विचार है। सवाल यह है कि यदि सरकार के स्तर पर ऐसी कोई योजना नहीं है तो भाजपा को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
देश में सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच बढ़ती खाई को लेकर बाबा रामदेव द्वारा गृहयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताए जाने पर भी इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संभव है कि बाबा रामदेव के पास सरकार की कोई आंतरिक रिपोर्ट पहुंची हो, जिसके आधार पर उन्हें लग रहा हो कि सामाजिक खाई बढ़ रही है। सरकार पहले इस खाई को पाटने की कोशिश करने की बात करती रही है, लेकिन यदि अब यही खाई बढ़ने की बात कही जा रही है तो इसके कारणों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यदि सरकार के करीबी माने जाने वाले लोग इस तरह के बयान देने लगे हैं तो इससे राजनीतिक माहौल में बदलाव का संकेत मिलता है। शायद इसी वजह से बाबा रामदेव के सुर और स्वर दोनों बदल गए हैं।
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं को जारी नोटिस पर प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले दिन से एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं और इस संबंध में प्रस्तुतीकरण भी दे चुके हैं। अब जब भाजपा की मुख्यमंत्री समेत कई बड़े अधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और प्रतिष्ठित लोगों को भी नोटिस मिले हैं, तो इस प्रक्रिया की गंभीरता पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर के माध्यम से आम नागरिकों की गरिमा और लोकतांत्रिक अधिकारों का मजाक बना रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाएं लंबे संघर्ष के बाद बनी हैं और किसी अधिकारी की जिद के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था को बंधक नहीं बनाया जा सकता। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति को नोटिस मिलता है और कुछ ही घंटों में चुनाव आयोग उसके मामले को संज्ञान में लेकर दुरुस्त कर देता है, तो सवाल यह है कि किसी दूरदराज के गांव की महिला या सामान्य नागरिक को इसी तरह की समस्या होने पर क्या इतनी तेजी से कार्रवाई होती है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले सामान्य मतदाताओं को यदि नोटिस मिलता है तो उन्हें दस्तावेज जुटाने और अधिकारियों के चक्कर लगाने में काफी परेशानी हो सकती है।
उन्होंने बंगाल की मतदाता सूची से जुड़े विवाद का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में उनमें से कुछ को फिर मतदाता माना गया। मताधिकार छिनना लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर विषय है। प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया आम मतदाताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है। लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सर्वोच्च महत्व रखता है और किसी भी प्रक्रिया के कारण पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित नहीं होने चाहिए।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर सामने आ रही अपील पर भी इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रतिक्रिया दी। जब उनसे पूछा गया कि कुछ नेताओं की ओर से दोनों दलों से साथ आने की अपील की जा रही है, तो उन्होंने 2013 में दोनों दलों के बीच गठबंधन टूटने का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि पहले यह बताया जाना चाहिए कि 2013 में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों छोड़ा था। इस सवाल का जवाब मिलने के बाद ही भविष्य में की जा रही किसी राजनीतिक पेशकश पर विचार करने की बात की जा सकती है।
--आईएएनएस
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