यूपी चुनाव में साथ आएं सपा-बसपा समर्थक, सामाजिक न्याय से हटेगी भाजपा: अमीक जामेई
लखनऊ, 11 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने मायावती, सपा-कांग्रेस गठबंधन, सहारनपुर मस्जिद विवाद, आजम खान के खिलाफ दर्ज एक और एफआईआर, गोंडा की घटना और ब्रिक्स सम्मेलन समेत कई मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति से जोड़ते हुए भाजपा सरकार को हटाने का दावा किया।
मायावती को लेकर अमीक जामेई ने कहा कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव उनका बेहद सम्मान करते हैं। उत्तर प्रदेश के सामाजिक न्याय के इतिहास में लाल और नीले रंग के राजनीतिक मेल का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी राजनीतिक सहयोग से कांशीराम संसद पहुंचे और मायावती के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी बना।
जामेई ने कहा कि 2027 में सामाजिक न्याय, बंधुत्व और एकता के लिए सपा और बसपा के समर्थकों को साथ आना चाहिए। छात्र और युवा भी अब सामाजिक न्याय की राजनीति के साथ जुड़ रहे हैं और सपा भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने के लिए व्यापक सामाजिक समर्थन जुटाएगी।
सहारनपुर में मस्जिद से जुड़े विवाद पर जामेई ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई की और इसका इस्तेमाल हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी हिंदू समाज को किसी भी तरह से मुस्लिम विरोधी मानने के पक्ष में नहीं है। हिंदू समाज में दया और करुणा की भावना है और जो कार्रवाई हुई, उसकी जिम्मेदारी कार्यपालिका की है।
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर जामेई ने कहा कि मौजूदा समय में संगठन में चीन का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने भारत सरकार से सम्मेलन के मंच का इस्तेमाल राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों को उठाने की मांग की। उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव के उस आकलन का हवाला दिया, जिसमें चीन को भारत के लिए बड़ी चुनौती बताया गया था। भारत को चीन के साथ सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स की ओर से स्पष्ट निंदा का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीति और पाकिस्तान की भूमिका का भी जिक्र किया। जामेई ने कहा कि भारत को अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति और विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने केंद्र की विदेश नीति को लेकर अखिलेश यादव के पहले दिए गए राजनीतिक बयान का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा।
आजम खान से जुड़े हज समिति की जमीन के मामले में नई एफआईआर को लेकर जामेई ने कहा कि हज से जुड़ी गतिविधियों से देश में बड़ी आर्थिक गतिविधियां होती हैं और इससे रोजगार भी मिलता है। उन्होंने कहा कि आजम खान को लगातार अलग-अलग मामलों में घेरा जा रहा है। अगर कोई मामला है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन लगातार मामलों के जरिए किसी नेता को निशाना बनाना उचित नहीं है।
गोंडा में साहनी परिवार से जुड़ी घटना को लेकर जामेई ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस पर आम लोगों के साथ भेदभाव और मनमानी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। जामेई ने निषाद, राजभर और अन्य पिछड़े वर्गों के युवाओं से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए सहयोगी दलों के नेताओं संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर से सरकार के सामने इन मुद्दों को उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर वे सरकार के सहयोगी हैं तो उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलकर न्याय की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पीडीए से जुड़े वर्गों पर हमला हो रहा है और समाजवादी पार्टी अब इसके खिलाफ खुलकर राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी। पुलिस के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों पर जामेई ने सरकार से जवाबदेही की मांग की।
लखनऊ में भाजपा बूथ अध्यक्ष अरविंद रावत द्वारा पुलिस पर मारपीट के लगाए गए आरोपों पर भी जामेई ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा या आरएसएस से जुड़े एससी और ओबीसी नेता अपने साथ अन्याय की शिकायत कर रहे हैं, तो उन्हें संगठन के भीतर भी सवाल उठाने चाहिए। जामेई ने भाजपा नेताओं से ऐसे मामलों में सामूहिक रूप से आवाज उठाने और सरकार से जवाब मांगने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि केवल किसी नेता या मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत भरोसा करने से सामाजिक भेदभाव की समस्या समाप्त नहीं होगी।
--आईएएनएस
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