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यूपी: आजमगढ़ शेरपुर कुटी महंत राम कृष्ण दास ने शिवरात्रि की शुभकामनाएं दीं, कोल्हूनाथ शिवलिंग की महिमा बताई

आजमगढ़, 14 फरवरी (आईएएनएस)। देशभर में शिवरात्रि को लेकर खास तैयारियां चल रही हैं। इस दौरान शेरपुर कुटी के महंत राम कृष्ण दास जी महाराज ने सभी देशवासियों को शिवरात्रि की शुभकामनाएं दी।
यूपी: आजमगढ़ शेरपुर कुटी महंत राम कृष्ण दास ने शिवरात्रि की शुभकामनाएं दीं, कोल्हूनाथ शिवलिंग की महिमा बताई

आजमगढ़, 14 फरवरी (आईएएनएस)। देशभर में शिवरात्रि को लेकर खास तैयारियां चल रही हैं। इस दौरान शेरपुर कुटी के महंत राम कृष्ण दास जी महाराज ने सभी देशवासियों को शिवरात्रि की शुभकामनाएं दी।

शेरपुर कुटी के महंत राम कृष्ण दास ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह संस्कार हुआ था। माता पार्वती शिव की अर्धांगिनी बन गई थीं। वे शक्ति हैं, जिनकी उपासना भगवान राम ने भी की। भगवान राम के वनवास के समय पुल बनाने की योजना चल रही थी, तो उन्होंने शक्ति को याद किया। भगवान राम के ईश्वर शंकर जी हैं, और शंकर जी के ईश्वर भगवान राम हैं।"

उन्होंने कहा, "शिवरात्रि महापर्व है। शेरपुर कुटी पर युगों-युगों से यह पर्व मनाया जाता रहा है। इस मौके पर बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं और अपनी आस्था के अनुसार भगवान को याद करते हैं। यहां पर स्थित शिवलिंग का आकार कोल्हू की तरह होने के नाते, कोल्हूनाथ नामकरण हुआ है। शिव का यह स्थान करीब 5,300 वर्ष पुराना है। यहां पर शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए हैं।"

महंत राम कृष्ण दास जी महाराज ने हालिया शंकराचार्य विवाद को लेकर कहा, "विश्व स्वरूपानंद जी ने किसी को अपना शिष्य नहीं बनाया था; यह मामला कोर्ट में लंबित है। शंकराचार्य बहुत सम्मानित पद है, जो अभी किसी को प्राप्त नहीं है। अविमुक्तेश्वरानंद कांग्रेस के समर्थक हैं। अहिल्याबाई होल्कर के समय देश में जितने मंदिरों का निर्माण कराया गया, उसके बाद किसी ने नहीं कराया। अब जब पीएम मोदी का शासनकाल आया है, तो देश के मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। उन्होंने अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण कराया।"

उन्होंने कहा, "प्रयागराज में जो मेला चल रहा था, उसमें सभी लोग पैदल चलकर स्नान के लिए जाते हैं। जब महाकुंभ का पर्व आता है, जैसे बसंत पंचमी, मौनी अमावस्या और मकर संक्रांति, तो शाही स्नान माना जाता है। जिस प्रकार राजा सज-धज कर जाते थे, उसी तरह महात्मा जाते थे। अविमुक्तेश्वरानंद राजनीति में प्रकरण के नाते मार्ग को अवरुद्ध कर रहे थे, जिससे शासन-प्रशासन को काफी नुकसान हुआ। इससे आस्थाओं पर गहरा आघात पहुंचा।"

--आईएएनएस

एससीएच/डीएससी

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