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उज्जैन: निर्जला एकादशी पर वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा भक्तों का सैलाब

उज्जैन, 25 जून (आईएएनएस)। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन निर्जला एकादशी के अवसर पर गुरुवार की सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित भस्म आरती के दौरान आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
उज्जैन: निर्जला एकादशी पर वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा भक्तों का सैलाब

उज्जैन, 25 जून (आईएएनएस)। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन निर्जला एकादशी के अवसर पर गुरुवार की सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित भस्म आरती के दौरान आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन पाने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े। देर रात से ही भक्त लंबी कतारों में लगकर अपने आराध्य देव के दर्शन का इंतजार करते नजर आए।

सुबह 4 बजे बाबा महाकाल को जागृत किया गया। इसके बाद उनका विशेष श्रृंगार किया गया। निर्जला एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का वैष्णव तिलक से अलौकिक श्रृंगार किया गया और विधि-विधान से भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म रमाने के बाद बाबा ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। महाकाल मंदिर परिसर पूरे समय 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंजता रहा।

जानकारी के अनुसार, पहले बाबा महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की गई भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य माना जाता है।

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसके दिव्य दर्शन करने के लिए आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ कई बड़ी हस्तियां भी उज्जैन पहुंचती हैं।

बता दें कि इस साल निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई गई। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इसे सबसे बड़ी और श्रेष्ठ एकादशी मानी जाती है, जिसमें बिना जल और अन्न ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा, आरती और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है। साथ ही जल से भरा घड़ा, फल, छाता और वस्त्र का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

--आईएएनएस

वीकेयू/डीकेपी

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