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उदयनिधि स्टालिन बोले- हिंदी के खिलाफ नहीं, थोपे जाने का विरोध; वीडियो में कहा- दो भाषा नीति राष्ट्रीय एकता के खिलाफ नहीं

उदयनिधि स्टालिन बोले- हिंदी के खिलाफ नहीं, थोपे जाने का विरोध; वीडियो में कहा- दो भाषा नीति राष्ट्रीय एकता के खिलाफ नहीं

तमिलनाडु के विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने शुक्रवार को हिंदी भाषा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह हिंदी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि किसी भी भाषा को थोपे जाने का विरोध करते हैं। उदयनिधि ने कहा कि तमिलनाडु खुद को भारत से अलग नहीं मानता और राज्य की अपनी भाषाई पहचान है। उनके मुताबिक, राज्य की दो-भाषा नीति को राष्ट्रीय एकता के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए।

उदयनिधि का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आया, जिसमें अदालत ने तमिलनाडु सरकार से जवाहर नवोदय विद्यालयों के विरोध पर दोबारा विचार करने को कहा था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि तमिलनाडु में हिंदी को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता।

नवोदय विद्यालयों को लेकर भी रखा पक्ष

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु को जवाहर नवोदय विद्यालयों की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि राज्य में वंचित और जरूरतमंद छात्रों की शिक्षा के लिए पहले से ही कई सरकारी स्कूल और योजनाएं संचालित हैं। ऐसे में राज्य अपनी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की भाषा नीति को केवल हिंदी के विरोध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, राज्य अपनी भाषाई पहचान और लंबे समय से चली आ रही दो-भाषा नीति को बनाए रखना चाहता है।

हिंदी सीखने और देशभक्ति का संबंध नहीं

उदयनिधि ने हिंदी सीखने और देशभक्ति के बीच किसी भी तरह का सीधा संबंध होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की देशभक्ति इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि वह कौन-सी भाषा बोलता या सीखता है। उनका कहना है कि भारत की पहचान उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता में है।

उन्होंने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है। उनके अनुसार, अलग-अलग राज्यों को अपनी परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार भाषा नीति तय करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

‘विविधता में एकता का सम्मान जरूरी’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि भारत की एकता अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के सम्मान से मजबूत होती है। उन्होंने कहा, “विविधता में एकता का सम्मान और राज्यों को अपनी पसंद की भाषा नीति अपनाने की अनुमति भारत की एकता को और मजबूत करेगी।”

उनका बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु में भाषा नीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र तथा राज्य के बीच राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। जवाहर नवोदय विद्यालयों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उदयनिधि ने अपने बयान के जरिए स्पष्ट किया कि तमिलनाडु का विरोध हिंदी भाषा से नहीं, बल्कि भाषा थोपे जाने की किसी भी कोशिश से है।

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