मणिपुर में दो कुकी युवक लापता, अपहरण के आरोप के बाद 48 घंटे का बंद, वीडियो में जाने संगठन ने नगा समुदाय पर लगाया आरोप, सुरक्षित रिहाई की मांग
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में दो युवकों के लापता होने के बाद तनाव बढ़ गया है। कुकी समुदाय के संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने घटना के विरोध में 48 घंटे के बंद का ऐलान किया है। यह बंद गुरुवार शाम 5 बजे से शुरू हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों युवक बुधवार शाम से लापता हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि नगा समुदाय के लोगों ने दोनों का अपहरण किया है। हालांकि, इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।लापता युवकों की पहचान 21 वर्षीय थांगगिनलुन चोंगलोई और 20 वर्षीय पाओगिनलाल हैंगसिंग के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दोनों बुधवार शाम कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव के पास से लापता हुए थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर उनकी तलाश शुरू की गई, लेकिन अब तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
COTU ने 48 घंटे के बंद का किया ऐलान
दो युवकों के लापता होने की घटना के बाद कुकी समुदाय के संगठन COTU ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने गुरुवार शाम 5 बजे से 48 घंटे के बंद की घोषणा की। संगठन ने घटना की निंदा करते हुए दोनों युवकों की तत्काल, सुरक्षित और बिना किसी शर्त रिहाई की मांग की है।COTU का आरोप है कि दोनों युवकों का नगा समुदाय के लोगों ने अपहरण किया है। संगठन ने सरकार और प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने तथा युवकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।संगठन का कहना है कि दोनों युवकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनकी सुरक्षित वापसी तक मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पुलिस और प्रशासन कर रहे तलाश
एक अधिकारी ने बताया कि दोनों लापता युवकों का अब तक कोई पता नहीं चला है। मामले की जांच की जा रही है और उनकी तलाश के प्रयास जारी हैं। प्रशासन घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है।फिलहाल अपहरण के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों युवक किन परिस्थितियों में लापता हुए। बंद के ऐलान के बाद जिले में स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
मणिपुर में पहले से जारी है जातीय तनाव
गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई 2023 को मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। इसके बाद राज्य के कई इलाकों में हिंसा, आगजनी और संघर्ष की घटनाएं सामने आई थीं। इस हिंसा में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी।ह्यूमन राइट्स वॉच के सितंबर 2026 के आकलन के मुताबिक, मणिपुर हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 60 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए।ऐसे में कांगपोकपी जिले में दो युवकों के लापता होने की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन की जांच और दोनों युवकों की सुरक्षित वापसी पर है।

