बारां के दो किसानों ने खोजी सरसों की नई किस्म, पैदावार में सामान्य से दोगुनी
कहते हैं कि मिट्टी और बीज की परख एक किसान को ही होती है, जिसे कोई लैब में बैठे वैज्ञानिक शायद ही पूरी तरह समझ पाए। राजस्थान के बारां जिले के दो किसानों ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। नरसिंहपुरा गांव के किसान राजकुमार शर्मा और महेंद्र प्रताप सिंह ने सरसों की एक नई किस्म विकसित की है, जो न केवल देखने में अलग है बल्कि पैदावार में सामान्य सरसों से दोगुनी है।
किसानों के अनुसार, यह नई सरसों की किस्म गहराई और रंग में अनोखी है। उन्होंने वर्षों की मेहनत और अनुभव के आधार पर बीजों का चुनाव और खेती के अनुकूल बदलाव करके इस किस्म को तैयार किया। राजकुमार शर्मा ने बताया, “हमने बीज की गुणवत्ता, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और जलवायु को ध्यान में रखते हुए यह नई किस्म विकसित की है। इसका रंग और फूल भी सामान्य सरसों से अलग है, और पैदावार में यह दोगुनी उपज देती है।”
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फसल जल्दी तैयार होती है और बाजार में बेहतर दाम मिलता है। उन्होंने बताया कि इस नई किस्म के बीज का उत्पादन गांव के अन्य किसानों के लिए भी शुरू किया जा रहा है, ताकि क्षेत्र के किसानों को अधिक लाभ और स्थिर आय मिल सके।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान द्वारा खोजी गई इस किस्म से क्षेत्र में सरसों की उपज और गुणवत्ता दोनों में सुधार होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस किस्म को बड़े पैमाने पर अपनाया गया, तो राजस्थान के सरसों उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ किसानों की आमदनी भी बढ़ सकती है।
स्थानीय कृषि विभाग ने भी इस किस्म की सफलता की सराहना की है। विभाग ने कहा कि किसानों की इस खोज से यह साबित होता है कि किसानों की जमीन और बीज के प्रति अनुभव और सूझ-बूझ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बेहतर हो सकती है। विभाग जल्द ही इस किस्म की सर्टिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करने और बीज वितरण के लिए योजना बनाएगा।
राजकुमार शर्मा और महेंद्र प्रताप सिंह की मेहनत ने यह भी साबित कर दिया कि अनुभव और परिश्रम से छोटे किसानों के लिए बड़े अवसर संभव हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि खेती में नवाचार और प्रयोगशीलता से न केवल पैदावार बढ़ाई जा सकती है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया जा सकता है।
इस खोज से बारां जिले के किसानों में उत्साह का माहौल है। कई किसान अब इस नई किस्म की सरसों को अपनाने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह किस्म स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार विकसित की गई है, इसलिए इसे अपनाने से किसानों को अनुकूल परिणाम मिलने की पूरी संभावना है।
इस प्रकार, बारां के राजकुमार शर्मा और महेंद्र प्रताप सिंह की मेहनत और नवाचार ने यह साबित कर दिया कि किसानों की समझ और अनुभव किसी भी लैब के वैज्ञानिक ज्ञान से कम नहीं है। उनकी खोज से न केवल सरसों की पैदावार में सुधार होगा, बल्कि राजस्थान के किसानों के लिए संपूर्ण आर्थिक और कृषि लाभ भी सुनिश्चित होगा।

