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तूलिका मान: व्यस्त रहने के लिए जूडो खेलना शुरू किया, कॉमनवेल्थ में देश को दिलाया 'रजत पदक'

तूलिका मान: व्यस्त रहने के लिए जूडो खेलना शुरू किया, कॉमनवेल्थ में देश को दिलाया 'रजत पदक'
तूलिका मान: व्यस्त रहने के लिए जूडो खेलना शुरू किया, कॉमनवेल्थ में देश को दिलाया 'रजत पदक'

नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा। भारतीय टीम ने 2 स्वर्ण और 1 रजत सहित कुल 3 पदक इस खेल में अपने नाम किया। यह पहला मौका था, जब देश को जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक मिला। स्वर्ण पदक मिलना इस बात का सबूत है जूडो में भारतीय खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत उपस्थिति हो रही है। तूलिका मान का नाम इसमें अहम है।

जूडो में भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने में तूलिका का अहम योगदान रहा है। 9 सितंबर 1998 को दिल्ली में जन्मी तूलिका की एक सफल जूडो खिलाड़ी बनने की यात्रा आसान नहीं रही है। बचपन में ही पिता को खोने वाली तूलिका का पालन-पोषण उनकी मां ने किया। तूलिका को बचपन में जूडो में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी।

दरअसल, उनकी मां अमृता मान नौकरी की वजह से दिन में घर से बाहर रहती थीं। इस दौरान तूलिका को घर में अकेले रहना पड़ता था। अकेलेपन को दूर करन के लिए तूलिका ने जूडो क्लास ज्वाइन किया और यहीं से इस खेल के प्रति उनकी दिलचस्पी जगी। चौथी क्लास से ही जूडो का अभ्यास कर रही तूलिका ने कड़ी मेहनत से दिखाया कि वह इस खेल में काफी आगे जा सकती है। राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में दमदार प्रदर्शन के बाद तूलिका ने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीत अपनी प्रतिभा और क्षमता का आभास पूरे देश को कराया।

78+ श्रेणी में हिस्सा लेने वाली तूलिका ने 2017 में बिश्केक और 2018 में बेरूत में हुए एशियन जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। काठमांडू में 2019 में आयोजित दक्षिण एशियाई खेल में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनमवेल्थ गेम्स में तूलिका की प्रतिभा को पूरी दुनिया ने देखा था। तूलिका ने इस इवेंट में रजत पदक जीता था।

तूलिका ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा नहीं लिया था।

एक ऐसा खेल जिसे खुद को व्यस्त रखने के लिए शुरू किया गया हो, उसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करना निश्चित ही कठिन परिश्रम, त्याग और अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण के बिना संभव नहीं हो सकता है। तूलिका ने इसे करके दिखाया है और देश में खासकर वैसी युवा लड़कियों जो खेल के क्षेत्र में कुछ करना चाहती हैं, उनके लिए आदर्श बनकर उभरीं हैं।

--आईएएनएस

पीएके

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