त्रेतायुग से जुड़ा है 'त्रिवेणी रक्षक' का इतिहास, यहां दर्शन किए बिना अधूरी मानी जाती है प्रयागराज की तीर्थयात्रा
प्रयागराज, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। शिवनगरी काशी के पड़ोस में प्रयागराज स्थित है, जिसे 'संगम नगरी' भी कहा जाता है। इस 'नगरी के रक्षक' नारायण हैं। शहर में भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र तीर्थ है, यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि त्रेतायुग का जीवंत साक्षी भी है। मान्यता है कि नारायण के मंदिर में दर्शन किए बिना प्रयागराज की तीर्थयात्रा पूरी नहीं होती।
जनश्रुतियों और पुराणों के अनुसार, श्री वेणी माधव मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा है। त्रिवेणी संगम की रक्षा और भगवान विष्णु के माधव स्वरूप से जुड़े इस मंदिर का पौराणिक महत्व है। पद्म पुराण के अनुसार, तीर्थराज में भगवान विष्णु वेणी माधव के रूप में विराजमान हैं। कथा है कि त्रेता युग में राक्षस गजकर्ण के अत्याचार से तीनों लोक पीड़ित थे। भगवान विष्णु ने गजकर्ण का संहार कर त्रिवेणी (गंगा, यमुना और सरस्वती) की रक्षा की। त्रिवेणी जी की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वेणी माधव रूप में प्रयाग में स्थायी रूप से निवास करने का वरदान दिया, इसलिए वेणी माधव को प्रयागराज का प्रधान देवता और त्रिवेणी रक्षक माना जाता है।
मंदिर में श्याम रंग की शालिग्राम शिला से बनी माधव प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित है। यहां माधव की प्रतिमा के साथ त्रिवेणी जी की प्रतिमा भी स्थापित है। दोनों प्रतिमाएं काले शालिग्राम शिला से बनी हैं, माधव शंख और चक्र धारण किए हुए हैं। यह मुख्य मंदिर नगर देवता और लक्ष्मी नारायण मंदिर जैसे कई नामों से प्रसिद्ध है। मंदिर के मुख्य द्वार पर सुनहरे अक्षरों में 'नगर देवता' और 'माधो सकल काम साधो' लिखा हुआ है।
चैतन्य महाप्रभु भी अपने प्रयाग प्रवास के दौरान यहां रहकर भजन-कीर्तन किया करते थे। प्रयाग में भगवान विष्णु कुल 12 स्वरूपों में विराजमान हैं, जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। इनमें वेणी माधव मुख्य पीठ है। इसके अलावा अन्य 11 स्वरूप में चक्र माधव, गदा माधव, पद्म माधव, अनंत माधव, बिंदु माधव, मनोहर माधव, असि माधव, संकट हरण माधव, आदि वेणी माधव, आदि वट माधव और शंख माधव हैं। चक्र माधव को 14 महाविद्याओं से परिपूर्ण माना जाता है। इनके दर्शन-पूजन से विद्या प्राप्ति होती है।
आदि वट माधव को मूल माधव भी कहते हैं, क्योंकि प्रलयकाल में भगवान माधव वट वृक्ष में सिमट जाते हैं और सृष्टि काल में विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं।
श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज जंक्शन से लगभग 7 किलोमीटर दूर दारागंज क्षेत्र में दशाश्वमेध घाट के समीप स्थित है। प्रयागराज रेलवे स्टेशन से ऑटो, रिक्शा या टैक्सी से आसानी से पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भी मंदिर अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मंदिर सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।
आम दिनों के साथ ही कृष्ण जन्माष्टमी, पूर्णिमा, अनंत चतुर्दशी, एकादशी समेत अन्य विशेष दिनों में भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। दूर-दूर से श्रद्धालु आकर भगवान वेणी माधव के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
--आईएएनएस
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