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प्रवेशोत्सव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता: 3 से 18 वर्ष के सभी बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन के निर्देश, आज तक का अल्टीमेटम

प्रवेशोत्सव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता: 3 से 18 वर्ष के सभी बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन के निर्देश, आज तक का अल्टीमेटम

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और हर बच्चे को विद्यालय से जोड़ने के उद्देश्य से प्रवेशोत्सव अभियान को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन और विद्यालय में ठहराव सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए स्कूल स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक व्यापक मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जा रही है।

नामांकन और ठहराव पर विशेष जोर

प्रवेशोत्सव अभियान के तहत केवल नामांकन ही नहीं, बल्कि बच्चों का नियमित विद्यालय में ठहराव भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

विद्यालयों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे ऐसे बच्चों की पहचान करें जो किसी कारणवश स्कूल से बाहर हैं और उन्हें पुनः शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाए। साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

“आज तक” का अल्टीमेटम

प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित अधिकारी आज तक प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र बच्चा नामांकन से वंचित न रहे। इस अल्टीमेटम के बाद विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज कर दी गई हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समयबद्ध लक्ष्य को पूरा करने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार फील्ड में काम कर रही हैं।

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल

इस अभियान को राज्य में शिक्षा व्यवस्था सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जाता है, तो इससे न केवल साक्षरता दर में वृद्धि होगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चा स्कूल जाए, नियमित पढ़ाई करे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे।

स्थानीय स्तर पर अभियान तेज

जिला और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों ने स्कूलों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करें।

इसके साथ ही समुदाय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि शिक्षा के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ सके।

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