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टीएमसी के नाम और चिह्न पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, आयोग के फैसले को दी चुनौती

टीएमसी के नाम और चिह्न पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, आयोग के फैसले को दी चुनौती
टीएमसी के नाम और चिह्न पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, आयोग के फैसले को दी चुनौती

नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और उसके पारंपरिक 'जोड़ा फूल और घास' चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।

ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में ऋतब्रत बनर्जी और चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया है।

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद के बाद अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों को 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और उसके पारंपरिक 'जोड़ा फूल और घास' चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह व्यवस्था पार्टी विवाद पर अंतिम फैसला होने तक लागू रहेगी।

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल प्लेयर' चुनाव चिह्न मिला है, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

यह विवाद पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले सामने आया है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के कारण दोनों गुट इन उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले का कड़ा विरोध किया है और इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक बताया है। उन्होंने साफ किया था कि नया नाम और चुनाव चिह्न देना चुनाव आयोग के आदेश को स्वीकार करना नहीं है और वह इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगी।

इस पूरे विवाद में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी ममता बनर्जी के गुट का समर्थन किया है। उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

इससे पहले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले की आलोचना की थी और आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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