टीएमसी के बागी नेताओं पर सौगत राय का निशाना, बोले-यह बगावत नहीं बल्कि धोखा है
कोलकाता, 5 जुलाई (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी नेताओं के नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने के मुद्दे पर मॉनसून सत्र के दौरान चर्चा को लेकर टीएमसी सांसद सौगत रॉय की प्रतिक्रिया सामने आई है।
सौगत रॉय ने कहा, "यह चर्चा का विषय नहीं है। तृणमूल कांग्रेस ने एनसीपीआई में शामिल होने वाले नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं दायर की हैं। स्पीकर उन याचिकाओं पर फैसला लेंगे। हमारा मकसद इस मुद्दे पर चर्चा करना नहीं है। हम इस बात पर ध्यान देंगे कि संसद में भाजपा के खिलाफ अपनी आवाज कैसे उठाई जाए। हम नीट परीक्षा और अयोध्या राम मंदिर चंदे से जुड़े विवादों के मुद्दे भी उठाएंगे।"
टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों के नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने और एक अलग गुट बनाने को लेकर सौगत रॉय ने कहा, "इस मामले पर स्पीकर फैसला करेंगे। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। यह पूरी तरह से स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है और फैसला स्पीकर की शक्तियों के अनुसार ही लिया जाएगा। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की याचिका दायर करने के अलावा, हमने स्पीकर को एक अलग याचिका भी सौंपी है। अब फैसला स्पीकर को ही करना है।"
6 जुलाई को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, "राम मंदिर के लिए मिले फंड का गलत इस्तेमाल करने की आरोपी भाजपा और आरएसएस से जुड़े हैं। जिन पर आरोप लगे हैं, वे चंपत राय के करीबी सहयोगी हैं, जो राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव थे। उन पर भी आरोप लगे हैं। हमें शक है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं, लेकिन हम चाहते हैं कि या तो सीबीआई जांच हो या न्यायिक जांच।"
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस बयान पर कि 'जिन्हें पार्टी से सब कुछ मिला, वही बगावत कर रहे हैं' को लेकर कहा, "यह बगावत नहीं, बल्कि धोखा है। बगावत एक बहुत बड़ा शब्द है और यह क्रांतिकारियों से जुड़ा है। यह धोखे का काम है। जिन्हें पार्टी से सबसे ज्यादा मिला (फिरहाद हकीम से लेकर चंद्रिमा भट्टाचार्य तक) वही लोग पार्टी छोड़कर गए हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।"
चंद्रिमा भट्टाचार्य के टीएमसी छोड़ने की वजहों पर सौगत रॉय ने कहा, "जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, वे दो चीजों (लालच और डर) से प्रेरित हैं। ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चंद्रिमा भट्टाचार्य एक बार विधानसभा चुनाव हार गई थीं। बाद में ममता बनर्जी ने उन्हें दूसरी सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया, जहां से वह चुनी गईं। ममता बनर्जी से इतना कुछ पाने के बावजूद, उन्होंने पार्टी के साथ धोखा किया है। यह उनके अपने सिद्धांतों को दिखाता है। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।"
मानसून सत्र के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट पेश किए जाने के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, "हां, भ्रष्टाचार के आरोप हैं। यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। अगर स्पीकर रिपोर्ट पेश करते हैं, तो सभी सदस्य उस पर वोट करेंगे। मेरी राय में, महाभियोग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।"
--आईएएनएस
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