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'टीएमसी और भाजपा के बीच मैच फिक्सिंग', कांग्रेस नेता ने कहा- इस बार बंगाल की जनता चुनेगी तीसरा विकल्प

रांची, 9 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कोलकाता में ईडी की कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच मैच फिक्सिंग है।
'टीएमसी और भाजपा के बीच मैच फिक्सिंग', कांग्रेस नेता ने कहा- इस बार बंगाल की जनता चुनेगी तीसरा विकल्प

रांची, 9 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कोलकाता में ईडी की कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच मैच फिक्सिंग है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में राकेश सिन्हा ने कहा, "जहां चुनाव होते हैं, वहां ईडी की कार्रवाई होती है। लेकिन पश्चिम बंगाल की घटना राजनीतिक पिच पर मैच फिक्सिंग है। ईडी की कार्रवाई हुई और तुरंत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं। उन्होंने फाइलें भी ले लीं।"

कांग्रेस नेता ने कहा कि वह कंपनी 10 साल से काम कर रही है। ईडी 10 साल से कहां थी? जब बंगाल में चुनाव हैं, तब ईडी की कार्रवाई की गई है। मतलब यह है कि भाजपा और टीएमसी के बीच मैच फिक्सिंग है। यह पश्चिम बंगाल की जनता समझ चुकी है और इस बार वह तीसरा विकल्प चुनेगी।

राज्यपाल सीवी आनंद बोस को जान से मारने की धमकी के विषय पर कांग्रेस नेता ने कहा कि इस तरह की घटनाएं सही नहीं हैं। अगर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को जान से मारने की धमकी मिलती है तो स्वभाविक तौर पर सवाल उठते हैं।

इसी बीच, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध ढांचे को गिराने के फैसले का समर्थन करने पर राकेश सिन्हा ने कहा, "अतिक्रमण पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन अतिक्रमण हटाने की आड़ में किसी बेगुनाह का घर नहीं गिराया जाना चाहिए। अगर किसी बेगुनाह का घर तोड़ा जाता है, तो यह वाकई चिंता की बात है। लेकिन अगर अवैध रूप से अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो यह एक अच्छा और स्वागत योग्य कदम है।"

उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम कटने पर कांग्रेस नेता ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग ने जिन लोगों का नाम काटा है, उन नामों की सूची जारी करनी चाहिए। लेकिन असलियत यह है कि चुनाव आयोग काटे गए नामों का प्रकाशन नहीं कर रहा है और यही सबसे बड़ी गड़बड़ है।"

--आईएएनएस

डीसीएच/

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