'तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और मां तारा के दर्शन के लिए की गई विशेष व्यवस्था', सीएम सुवेंदु ने कौशिकी अमावस्या की दी बधाई
कोलकाता, 10 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर में कौशिकी अमावस्या का पर्व मुख्य रूप से मनाए जाने को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से एक वीडियो संदेश जारी किया गया, जिसको बंगाल भाजपा के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर साझा किया गया है। सीएम सुवेंदु की ओर से कहा गया, "पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मैं मां तारा के सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देता हूं। इस बार मैं पवित्र कौशिकी अमावस्या के अवसर पर तारापीठ में हुई तैयारी बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुआ।"
उन्होंने आगे कहा, "प्रशासन के अधिकारियों, चुने हुए प्रतिनिधियों और सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। इस बार भक्तों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और मां तारा के निर्बाध दर्शन सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें वॉच टावर और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, अतिरिक्त बस और ट्रेन की व्यवस्था, पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं, आग से सुरक्षा के उपाय और प्राथमिक चिकित्सा के लिए स्वास्थ्य शिविर शामिल हैं।"
बता दें कि इस वर्ष कौशिकी अमावस्या का पर्व 10 सितंबर से 11 सितंबर के बीच है। माना जाता है कि इस दिन मां तारा देवी प्रकट हुई थीं। कौशिकी अमावस्या की रात्रि को शक्ति और तंत्र साधना के लिए खास महत्व माना जाता है। माना जाता है कि इस रात्र को मां तारा की आराधना करने से विशेष आध्यात्मिक उर्जा की प्राप्ति होती है। मंदिर के पास स्थित तारापीठ महाश्मशान में इस पूरी रात विशेष तांत्रिक और गुप्त पूजाएं की जाती हैं। मान्यता है कि इस रात मां तारा ने दुष्टों का नाश करने के लिए विशेष शक्ति रूप धारण किया था।
कौशिकी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर तारापीठ मंदिर में मां तारा के दर्शन कर विशेष पूजा करते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने से गर्भ गृह में प्रवेश और प्रतिमा को स्पर्श करने पर रोक लगाई जाती है। श्रद्धालुओं को दूर से ही मां तारा के दर्शन होते हैं। 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से अगले दिन 8:56 बजे तक कौशिक अमावस्या रहेगी। मां तारा और मां काली की पूजा 10 सितंबर की रात्रि को की जाएगी।
--आईएएनएस
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