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तिरंगा फहराने पर गिरफ्तारी को लेकर 'आप' बोली- क्या अपने ही देश में झंडा फहराना अपराध है?

तिरंगा फहराने पर गिरफ्तारी को लेकर 'आप' बोली- क्या अपने ही देश में झंडा फहराना अपराध है?
तिरंगा फहराने पर गिरफ्तारी को लेकर 'आप' बोली- क्या अपने ही देश में झंडा फहराना अपराध है?

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा है। पार्टी ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। आप नेताओं ने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की और आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि क्या अब अपने ही देश में तिरंगा फहराना भी अपराध हो गया है? उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को हास्यास्पद बताते हुए इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने सवाल किया कि क्या देश में अंग्रेजों का शासन चल रहा है, जो तिरंगा फहराने और भारत माता की जय के नारे लगाने पर युवाओं को जेल भेजा जा रहा है?

संजय सिंह के अनुसार, सीजेपी नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए थे। उन्होंने कहा कि देश के युवा आगे भी भारत माता की जय बोलेंगे और तिरंगा फहराएंगे। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजकर सरकार युवाओं की आवाज दबाने में सफल नहीं होगी। संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी कार्रवाइयों से लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर जनता की आवाज को रोका नहीं जा सकता।

आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की। उन्होंने कहा कि उस समय भी चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप, छात्र और मजदूर आंदोलन, आर्थिक संकट तथा राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा में थे। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में भी चुनावी धांधली के आरोपों, युवाओं के आंदोलनों और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है।

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले युवाओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। उन्होंने आगे कहा कि 1975 के आपातकाल के दौरान राज नारायण और मोरारजी देसाई जैसे नेताओं समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

भारद्वाज के अनुसार, मौजूदा समय में भी विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार औपचारिक रूप से आपातकाल घोषित किए बिना भी ऐसे कदम उठा सकती है, जिनसे लोकतांत्रिक गतिविधियां प्रभावित हों। सौरभ भारद्वाज ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेश नीति और भाजपा के आंतरिक राजनीतिक हालात को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने दावा किया कि देश आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और चीन की ओर से लद्दाख पर किए जा रहे दावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। भारद्वाज ने भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर कथित मतभेदों का भी जिक्र किया। तिरंगा फहराने के मामले में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को लेकर आम आदमी पार्टी ने इसे नागरिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की है।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीकेपी

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