Samachar Nama
×

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 12वीं गिरफ्तारी, सोनीपत के रोहणा गांव से अमन पकड़ा गया, खाते में मिले संदिग्ध लेनदेन

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 12वीं गिरफ्तारी, सोनीपत के रोहणा गांव से अमन पकड़ा गया, खाते में मिले संदिग्ध लेनदेन
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 12वीं गिरफ्तारी, सोनीपत के रोहणा गांव से अमन पकड़ा गया, खाते में मिले संदिग्ध लेनदेन

सोनीपत/मुंबई, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में एक अन्य गिरफ्तारी हुई है। हरियाणा के सोनीपत जिले के रोहणा गांव से अमन नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अमन पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपी कुणाल का दोस्त है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों में पैसों का लेनदेन हुआ था और अमन के खाते में भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं।

इसी आधार पर मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम सोनीपत पहुंची और अमन को हिरासत में लिया। अब मुंबई पुलिस अमन से पूछताछ करेगी कि फायरिंग की साजिश में उसकी क्या भूमिका थी और पैसों का लेनदेन किसके इशारे पर हुआ। अमन की गिरफ्तारी के साथ इस केस में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 12 हो गई है।

वहीं, इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों को गुरुवार को मुंबई की विशेष मकोका अदालत में पेश किया गया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने आरोपियों से पूछताछ के लिए अदालत से 10 दिनों की पुलिस कस्टडी की मांग की। पुलिस ने अदालत में दावा किया कि जांच के दौरान डिजिटल सबूत और आरोपियों के बीच हुई वॉइस चैट बरामद हुई है। आरोपी कथित तौर पर एक संगठित टीम के रूप में काम कर रहे थे।

क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले का कथित मुख्य गैंग लीडर अनिल पंडित है, जो फिलहाल फरार है। जांच एजेंसी का दावा है कि उसी के निर्देश पर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया गया।

पुलिस ने 10 दिनों की कस्टडी की मांग करते हुए कहा कि आरोपियों से हथियारों के स्रोत का पता लगाना बेहद जरूरी है। बरामद हथियारों में से एक के विदेशी होने की बात भी सामने आई है, जो इस केस को और गंभीर बनाता है। इसके अलावा, पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि आरोपियों को वारदात को अंजाम देने के लिए जमीनी स्तर पर किसने मदद पहुंचाई थी और रेकी किसने की थी।

क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बीच हुई बातचीत से जुड़े अहम डिजिटल सबूत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए सिग्नल जैसे विदेशी मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर एक-दूसरे से संपर्क करते थे। जांच एजेंसी ने इन सबूतों के आधार पर आरोपियों से पूछताछ करने और उनके वॉइस सैंपल रिकॉर्ड करने की अनुमति भी मांगी।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

Share this story

Tags