ये वायरल वीडियो झकझोर देगा आपकी अंतरआत्मा: मां को वृद्धाश्रम छोड़ने आई बेटी, वजह जानकर खौल जाएगा खून
जिन हाथों ने कभी उसे चलना सिखाया था, वही हाथ एक दिन एक अनजान दरवाज़े पर कांपते हुए रह गए... एक बेटी, एक माँ, और एक ही वाक्य: "घर में जगह नहीं है।" इस एक लाइन ने सोशल मीडिया पर लाखों दिलों को झकझोर दिया है। माँ के चेहरे पर बहते खामोश आँसू, और बेटी की बेबसी या बेपरवाही... यह वीडियो सिर्फ़ एक कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे समाज का आईना है जहाँ रिश्तों से ज़्यादा जगह ज़रूरी हो गई है।
🚨जब बेटी ही मां को वृद्ध आश्रम छोड़ने जाए बेशर्मी से बोले भी कि मां के लिए घर में जगह नहीं
— Ramesh Tiwari (@rameshofficial0) January 5, 2026
सोचिए : कभी गांव से किसी को नहीं सुना कि वृद्ध आश्रम छोड़ने गया सिर्फ शहरों में ये परिपाटी है
मां बाप शहर में बच्चों के लिए शिफ्ट होते है ,यही बच्चे मां बाप को बाद में वृद्ध आश्रम… pic.twitter.com/p1Wi50Ad3Q
"मैं अपनी मर्ज़ी से यहाँ नहीं आई..."
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @rameshofficial0 अकाउंट से शेयर किए गए इस 1 मिनट, 1 सेकंड के वीडियो में एक महिला अपनी माँ को वृद्धाश्रम ले जाती दिख रही है। एक आदमी, जो खुद को ऑफिस का कर्मचारी बताता है, उन्हें रोकता है और उनसे सवाल-जवाब करने लगता है। महिला कहती है कि यह उसकी माँ है और वह उन्हें वृद्धाश्रम इसलिए लाई है क्योंकि "घर में जगह नहीं है।" यह सुनकर माँ की आँखों में आँसू आ जाते हैं। जब कर्मचारी माँ से पूछता है कि क्या वह अपनी मर्ज़ी से आई हैं, तो बूढ़ी माँ धीरे से कहती है "नहीं।" यही पल वीडियो का दिल बन जाता है।
माँ की खामोशी, समाज की क्रूरता
माँ के आँसू और बेटी की बेबसी या बेपरवाही ने सोशल मीडिया यूज़र्स को बाँट दिया है। कुछ लोग बेटी की मजबूरी को समझते हैं, जबकि दूसरे इसे रिश्तों की टूटती नींव का संकेत मानते हैं। वीडियो के कैप्शन में कहा गया है कि गाँवों में माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ना कम होता है; यह चलन ज़्यादातर शहरों में देखा जाता है। यह दावा पर्सनल अनुभव पर आधारित है, हालाँकि इस मामले पर समाजशास्त्रियों की अलग-अलग राय है।

