इस मासूम को तो पता भी नहीं कि वो क्या पी रही है, वायरल वीडियो ने समाज को आईना दिखाया
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर और उससे जुड़ा वीडियो इन दिनों लोगों को झकझोर रहा है। तस्वीर में एक मासूम बच्ची किसी बोतल या गिलास से पेय पदार्थ पीती नजर आ रही है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसे खुद नहीं पता कि वह क्या पी रही है। इस दृश्य ने न सिर्फ लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, परवरिश और बड़ों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल कंटेंट को लेकर दावा किया जा रहा है कि बच्ची को मजाक या लापरवाही में ऐसा पेय पदार्थ दिया गया, जो उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तस्वीर सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों साफ देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे “खतरनाक लापरवाही” बताया है, जबकि कुछ ने इसे बच्चों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा करार दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को बिना जानकारी के किसी भी तरह का पेय या पदार्थ देना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। कम उम्र में बच्चे सही-गलत का फर्क नहीं समझ पाते और बड़ों पर पूरी तरह निर्भर होते हैं। ऐसे में माता-पिता या अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को हर तरह के जोखिम से दूर रखें।
यह मामला सिर्फ एक तस्वीर या वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की उस सोच को उजागर करता है, जहां कई बार मनोरंजन, दिखावे या सोशल मीडिया लाइक्स के लिए बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस तरह की घटनाएं बच्चों के व्यवहार और भविष्य पर गहरा असर डाल सकती हैं।
कानून के जानकारों के अनुसार, अगर किसी बच्चे को जानबूझकर या लापरवाही से नुकसानदेह चीज पिलाई जाती है, तो यह अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में बाल संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, वायरल कंटेंट के मामले में अब तक किसी तरह की आधिकारिक शिकायत या पुलिस कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल, यह तस्वीर एक चेतावनी बनकर सामने आई है—कि बच्चों की मासूमियत के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। समाज को यह समझना होगा कि बच्चे मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी हैं। सवाल यही है कि अगर अब भी हम नहीं चेते, तो इन मासूमों का भविष्य कितना सुरक्षित रहेगा?

