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भारत के इन 4 बड़े मंदिरों के पास है बेशुमार दौलत, जानें किसके पास कितना पैसा और जमीन
 

भारत के इन 4 बड़े मंदिरों के पास है बेशुमार दौलत, जानें किसके पास कितना पैसा और जमीन


भारत में मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि कई प्रमुख मंदिरों और ट्रस्ट के पास बड़ी मात्रा में बैंक जमा, जमीन, सोना और अन्य संपत्तियां भी हैं। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की संपत्ति से जुड़े ताजा आंकड़े सामने आने के बाद देश के सबसे समृद्ध मंदिर संस्थानों की संपत्ति एक बार फिर चर्चा में है।

हालांकि अलग-अलग मंदिरों के उपलब्ध आंकड़ों की तारीख अलग है, इसलिए इन्हें सीधे आज की संपत्ति की रैंकिंग मानना सही नहीं होगा।

पुरी जगन्नाथ मंदिर के पास 1,911 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक मंदिर के बैंक खातों में करीब 1,911.80 करोड़ रुपये जमा थे। इसमें लगभग 1,811.10 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे गए हैं।

मंदिर के पास संपत्ति के तौर पर करीब 60,821 एकड़ जमीन भी दर्ज है। इसमें 60,426 एकड़ जमीन ओडिशा के 24 जिलों में और करीब 395 एकड़ जमीन देश के छह अन्य राज्यों में बताई गई है।

इसके अलावा मंदिर के रत्न भंडार में सोना, हीरे और अन्य कीमती वस्तुएं मौजूद हैं। इनकी विस्तृत गणना और आकलन की प्रक्रिया जारी है।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पास कितनी रकम?

अयोध्या के राम मंदिर की व्यवस्था संभालने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास 31 मार्च 2026 तक करीब 1,882 करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि बताई गई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रस्ट को करीब 237 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि 91 करोड़ रुपये खर्च किए गए। निर्माण और अन्य कार्यों पर करीब 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च भी हुआ।

मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को देखते हुए ट्रस्ट प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, चढ़ावे और निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए अपनी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत कर रहा है।

गुरुवायूर मंदिर के पास 1,737 करोड़ रुपये की बैंक जमा

केरल के प्रसिद्ध गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर की संपत्ति से जुड़े आंकड़े RTI के जरिए सामने आए थे। इनके मुताबिक मंदिर के अलग-अलग बैंक खातों में करीब 1,737.04 करोड़ रुपये जमा थे।

इसके अलावा मंदिर के पास लगभग 271.05 एकड़ जमीन बताई गई थी। मंदिर के सोने, चांदी और कीमती पत्थरों की पूरी कीमत सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े 2022 के आसपास के हैं, इसलिए इन्हें 2026 की मौजूदा बैंक जमा राशि नहीं माना जा सकता।

तिरुपति TTD के पास हजारों करोड़ की जमा राशि

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को देश के सबसे बड़े और संपन्न मंदिर संस्थानों में गिना जाता है। उपलब्ध पुराने आंकड़ों के मुताबिक TTD के पास करीब 16,000 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि थी।

इसके अलावा TTD के पास बड़ी मात्रा में सोना और देश के अलग-अलग हिस्सों में कई संपत्तियां भी हैं। 16,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा भी 2022 के आसपास का बताया गया था।

वहीं 2026 के लिए TTD ने 5,456.26 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट मंजूर किया है। हालांकि बजट और बैंक में जमा राशि अलग-अलग चीजें हैं, इसलिए दोनों को जोड़कर मंदिर की कुल संपत्ति नहीं मानी जा सकती।

चार बड़े मंदिरों के आंकड़ों पर एक नजर
पुरी जगन्नाथ मंदिर: करीब 1,911.80 करोड़ रुपये बैंक जमा
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट: करीब 1,882 करोड़ रुपये उपलब्ध राशि
गुरुवायूर मंदिर: करीब 1,737.04 करोड़ रुपये बैंक जमा
तिरुपति TTD: पुराने आंकड़ों के अनुसार करीब 16,000 करोड़ रुपये बैंक जमा

इन आंकड़ों की तारीख अलग-अलग होने के कारण इन मंदिरों की संपत्ति की सटीक वर्तमान तुलना करना उचित नहीं है।

मंदिरों के पास इतनी संपत्ति आती कहां से है?

बड़े मंदिरों की आमदनी का सबसे प्रमुख स्रोत भक्तों की ओर से दिया जाने वाला दान और चढ़ावा होता है। इसके अलावा बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज, जमीन और संपत्तियों से होने वाली आय, सरकारी अनुदान तथा कुछ संस्थानों के अन्य स्रोत भी आमदनी का हिस्सा होते हैं।

पुरी जगन्नाथ मंदिर के मामले में दान के अलावा खदानों और पत्थरों से आय, बैंक ब्याज, जमीन से जुड़े लेन-देन और सरकारी अनुदान को भी आय के स्रोतों में शामिल किया गया है।

करोड़ों रुपये का इस्तेमाल कहां होता है?

मंदिरों के पास मौजूद धन का इस्तेमाल केवल पूजा-पाठ के लिए नहीं किया जाता। बड़ी रकम मंदिरों की रखरखाव व्यवस्था, कर्मचारियों के वेतन, सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक आयोजनों पर खर्च होती है।

इसके अलावा प्रसाद और भोजन व्यवस्था, मंदिर परिसर के विकास, नए निर्माण और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी खर्च किया जाता है। कई बड़े मंदिर शिक्षा, स्वास्थ्य, अन्नदान और अन्य सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों में भी धन खर्च करते हैं।

यानी इन मंदिर संस्थानों की आर्थिक गतिविधियां केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक, सामाजिक और जनसेवा से जुड़े काम भी संचालित किए जाते हैं।

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