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दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे प्रदर्शन, वीडियो में जाने केंद्र सरकार ने बदली व्यवस्था, वीडियो में जाने रामलीला मैदान समेत 3 जगहों को चुना

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन और दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह उनका मुद्दा नहीं है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर याचिका दाखिल कर सकता है। CJI सूर्यकांत सोमवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी यह टिप्पणी सामने आई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार सवाल उठा रहे हैं।

विपक्षी नेताओं को मुलाकात से इनकार करने वाला पत्र आया सामने

इस बीच, CJI सूर्यकांत का वह पत्र भी सामने आया, जो उन्होंने रविवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं को मुलाकात के लिए समय देने से इनकार करते हुए लिखा था। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन हैं।CJI ने पत्र में कहा कि जब संबंधित मामले अदालत में लंबित हैं, तो उन पर अलग सेबैठक करना न्यायिक मर्यादा और नैतिकता के अनुरूप नहीं होगा। इसलिए विपक्षी नेताओं को मुलाकात का समय नहीं दिया जा सकता।इस पत्र से स्पष्ट हुआ कि अदालत में विचाराधीन मामलों पर चर्चा के लिए मुख्य न्यायाधीश से अलग से मुलाकात करने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांगा था समय

INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJI सूर्यकांत को पत्र लिखा था। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्य न्यायाधीश को सौंपना था।राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 12 अक्टूबर की शाम अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। इसके लिए उन्होंने मुलाकात का समय मांगा था। हालांकि, CJI ने अपने जवाब में कहा कि जिन विषयों पर विपक्ष चर्चा करना चाहता है, वे पहले से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।इसके बाद विपक्षी नेताओं ने अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाया।

SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद

SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।इसी मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में मार्च निकाला और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। दूसरी ओर, CJI की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि अदालत में लंबित मामलों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही आगे बढ़ना होगा।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला

CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे आम नागरिकों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सहित सभी के लिए खुले हैं। इसका अर्थ है कि अपनी शिकायतों और मांगों को लेकर संबंधित पक्ष कानून के अनुसार अदालत में याचिका दाखिल कर सकते हैं।अब SIR से जुड़े विवाद में दाखिल याचिकाओं पर होने वाली न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। विपक्ष की मांगों, चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

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