अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष सातवें दिन पहुँचा, वीडियो में देंखे ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की नई लहर शुरू की
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव लगातार बढ़ रहा है क्योंकि अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान के साथ जारी संघर्ष आज सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। ईरान ने इस लड़ाई में अपनी सैन्य रणनीति को और तेज करते हुए इजराइल के खिलाफ मिसाइलों की 22वीं खेप दागने की पुष्टि की है। इसके साथ ही, ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को सुसाइड ड्रोन के माध्यम से निशाना बनाने का दावा किया है।
ईरान की आधिकारिक सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), ने बताया कि यह कार्रवाई ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 की 22वीं लहर के तहत की गई। IRGC के बयान के अनुसार, इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों के भीतर जमीनी और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। इस अभियान में खोर्रमशहर, खैबर और फत्ताह जैसी उच्च क्षमता वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इन मिसाइलों की मारक क्षमता और सटीकता को लेकर ईरानी सेना ने जोर दिया कि यह अभियान इजराइल की सुरक्षा संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
ईरानी सेना के अनुसार, इस दौरान कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। ईरानी जमीनी बलों ने बड़े पैमाने पर सुसाइड ड्रोन हमला किया, जिसमें कई उच्च क्षति करने वाले ड्रोन अमेरिकी ठिकानों की ओर भेजे गए। ईरानी सरकारी टीवी ने इस हमले का लाइव विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि अमेरिकी बेस को निशाना बनाने में ड्रोन अभियान काफी सफल रहा। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिया कि आने वाले समय में ऐसे हमले लगातार जारी रहेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस कदम के माध्यम से इजराइल और अमेरिका को अपने दायरे में रखकर रणनीतिक दबाव बनाना चाहता है। वहीं, अमेरिका और इजराइल ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और अपने सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अमेरिकी और इजराइली सेना की ओर से फिलहाल जवाबी कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि स्थिति बेहद संवेदनशील है और किसी भी समय जवाबी कार्रवाई हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष पर चिंता व्यक्त कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और कई प्रमुख देशों ने तत्काल संवाद और शांति स्थापना की अपील की है। विश्लेषकों के अनुसार, इस संघर्ष का बढ़ना मध्यपूर्व में पहले से ही तनावग्रस्त स्थिति को और जटिल बना सकता है और वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ईरान की यह रणनीति केवल प्रत्यक्ष हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और इजराइल के सैन्य ढांचे और उनके रणनीतिक निर्णयों पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाने की दिशा में एक कदम है। इसके साथ ही, कुवैत में ड्रोन हमलों ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थितियों की सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी यह तनाव अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा और गंभीरता का निर्धारण इन हमलों के जवाब में अमेरिका और इजराइल की रणनीतिक कार्रवाइयों से होगा।

