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केंद्रीय बजट से यूपी के MSME सेक्टर को बड़ी राहत, पूंजी, बाजार और तकनीक से मिलेगी नई ताकत

केंद्रीय बजट से यूपी के MSME सेक्टर को बड़ी राहत, पूंजी, बाजार और तकनीक से मिलेगी नई ताकत

केंद्रीय बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) सेक्टर के लिए की गई घोषणाएं उत्तर प्रदेश के लाखों उद्यमियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई हैं। राज्य में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जिन्हें प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। बजट के प्रावधानों से इन इकाइयों को पूंजी, बाजार और तकनीक—तीनों स्तरों पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एमएसएमई हब बनकर उभरा है। हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, लेदर, पीतल, कालीन, लकड़ी और कृषि आधारित उद्योगों से जुड़े छोटे कारोबार लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। ऐसे में बजट में दी गई राहतें सीधे तौर पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देंगी।

बजट में एमएसएमई के लिए सस्ती ऋण सुविधा, क्रेडिट गारंटी, तकनीकी उन्नयन और बाजार विस्तार पर जोर दिया गया है। इससे छोटे उद्योगों को पूंजी जुटाने में आसानी होगी और वे अपने उत्पादन व गुणवत्ता को बेहतर बना सकेंगे। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

सरकार का मानना है कि तकनीकी आधुनिकीकरण और स्टार्टअप सपोर्ट से एमएसएमई अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, खासकर युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए।

उद्योग संगठनों का कहना है कि बजट में की गई पहलें छोटे उद्यमियों के लिए “ऑक्सीजन” साबित होंगी। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो प्रदेश में उत्पादन और निर्यात दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट में एमएसएमई सेक्टर को मिला यह प्रोत्साहन उत्तर प्रदेश को औद्योगिक विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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