समुद्र के नीचे बदल रहा इंटरनेट का रास्ता, भारत बन रहा नया डिजिटल हब; वीडियो में जाने चेन्नई की बढ़ी ताकत
दुनियाभर में इंटरनेट का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। अब युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिमों के बीच इन इंटरनेट केबलों के रूट में बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनियां ऐसे वैकल्पिक रास्तों पर ध्यान दे रही हैं, जहां डेटा ट्रैफिक को तेज और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सके। इस बदलाव का फायदा भारत को मिल रहा है और मुंबई के साथ चेन्नई की अहमियत तेजी से बढ़ रही है।
दरअसल, एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाले कई पुराने सबमरीन केबल रूट लाल सागर, स्वेज क्षेत्र और अन्य रणनीतिक समुद्री मार्गों से होकर गुजरते हैं। इन इलाकों में तनाव या किसी केबल को नुकसान पहुंचने की स्थिति में इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से भेजना पड़ सकता है। इससे नेटवर्क की स्पीड, लागत और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से दुनिया की टेक कंपनियां अब इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए नए समुद्री रास्तों पर निवेश कर रही हैं। हिंद महासागर इस बदलते नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत की भौगोलिक स्थिति इसे एशिया, अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।भारत में मुंबई लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल का प्रमुख लैंडिंग प्वाइंट रहा है। अब चेन्नई और देश के पूर्वी तट की भूमिका भी बढ़ रही है। नए केबल सिस्टम और लैंडिंग स्टेशन भारत को वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ एक ही रूट पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकते हैं।
AI के बढ़ते इस्तेमाल ने इस कनेक्टिविटी की जरूरत को और बढ़ा दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं के लिए बड़ी मात्रा में डेटा का तेज और लगातार ट्रांसफर जरूरी है। ऐसे में मजबूत सबमरीन केबल नेटवर्क भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अहम साबित हो सकता है।लक्षद्वीप क्षेत्र की भूमिका भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। कोच्चि-लक्षद्वीप सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर परियोजना के जरिए मुख्य भूमि को लक्षद्वीप के द्वीपों से जोड़ा गया है। इससे द्वीपों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ी है और डिजिटल सेवाओं के विस्तार का रास्ता खुला है।
इसके साथ ही भारत में डेटा सेंटर क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में डेटा सेंटर और केबल लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से टेक कंपनियों के लिए भारत की उपयोगिता बढ़ सकती है।विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में केवल नए इंटरनेट केबल बिछाना ही पर्याप्त नहीं होगा। केबल की सुरक्षा, रिपेयर सिस्टम, अलग-अलग रूट और लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी जरूरी होगा। हिंद महासागर में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार भारत के लिए टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और AI से जुड़े निवेश के नए अवसर पैदा कर सकता है।

