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दिल्ली से मुंबई जाने के लिए 3AC में बैठा था बंदा, बच्चे के रोने और परिवार की हरकतों से तंग आकर सुनाई खरी-खोटी, हो गया हंगामा

दिल्ली से मुंबई जाने के लिए 3AC में बैठा था बंदा, बच्चे के रोने और परिवार की हरकतों से तंग आकर सुनाई खरी-खोटी, हो गया हंगामा

रेल यात्राओं में अक्सर लोग अपनी निजी जगह और सुकून की उम्मीद करते हैं, लेकिन कभी-कभी साथी यात्रियों के कारण यह अनुभव चुनौतीपूर्ण बन जाता है। ऐसा ही मामला हाल ही में दिल्ली से मुंबई जा रही ट्रेन के थर्ड AC कोच में देखने को मिला, जहां एक पैसेंजर को अपने साथ वाले परिवार के व्यवहार से काफी परेशान होना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, पैसेंजर की सीट पर सफर के दौरान एक परिवार आया, जिसमें एक छोटा बच्चा भी था। शुरुआत में तो यह सामान्य स्थिति लगी, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उनकी हरकतों ने वातावरण को असहनीय बना दिया। परिवार ने रात के समय स्पीकर पर यूट्यूब चलाना शुरू किया, जिससे बाकी यात्रियों को परेशानी होने लगी। इसके साथ ही वे देर रात 12 से 1 बजे तक जोर-जोर से बतियाते रहे, जिससे पैसेंजर की नींद पूरी तरह प्रभावित हुई।

इसके अलावा परिवार ने मूंगफली और अन्य स्नैक्स खाने के दौरान कोच में गंदगी फैलाना भी शुरू कर दिया, जिससे पैसेंजर का धैर्य टूट गया। पैसेंजर ने वीडियो और सोशल मीडिया पर इसका जिक्र करते हुए बताया कि कई बार वह सहनशीलता के साथ नजरअंदाज करने की कोशिश करता रहा, लेकिन लगातार शोर और गंदगी के चलते उसे भड़कने से रोकना मुश्किल हो गया।

रेलवे यात्रियों के अनुसार, थर्ड AC में अन्य यात्री भी इस तरह की परेशानियों का सामना करते हैं। देर रात तक शोर, गंदगी और निजी जगह में हस्तक्षेप न सिर्फ मानसिक तनाव बढ़ाते हैं, बल्कि यात्रा को असुविधाजनक बना देते हैं। ऐसे मामले सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते रहते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यात्रियों को अपनी जिम्मेदारी और दूसरे यात्रियों का सम्मान बनाए रखना कितना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि थर्ड AC या किसी भी ट्रेन कोच में सफर के दौरान शोर, गंदगी और असभ्य व्यवहार पर संयम रखना चाहिए। यदि कोई यात्री दूसरों को परेशान कर रहा हो, तो कोच सुप्रीटेंडेंट या ट्रेन स्टाफ को सूचित करना सबसे सुरक्षित और उचित तरीका है।

सोशल मीडिया पर इस पैसेंजर की शिकायत वायरल होने के बाद लोग टिप्पणियों में अपनी सहानुभूति और अनुभव साझा कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह समस्या आम है और अक्सर लोग छोटे बच्चों के साथ यात्रा करते समय दूसरों की परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं। वहीं कुछ ने पैसेंजर की सहनशीलता की तारीफ की और कहा कि बिना किसी विवाद के स्थिति को संभालना कठिन काम है।

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