गयाजी में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, धान–चावल कारोबारी राजेश गुप्ता के ठिकानों पर सर्वे
बिहार के गयाजी शहर में गुरुवार की सुबह उस समय हलचल मच गई, जब आयकर विभाग की टीम ने धान और चावल कारोबार से जुड़े बड़े कारोबारी राजेश गुप्ता के ठिकानों पर एक साथ सर्वे कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई उनके आवास और राइस मिल दोनों स्थानों पर की गई, जो दिनभर जारी रही।
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग को कारोबारी के लेन-देन, आय और कर भुगतान से संबंधित अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। इसी के आधार पर विभाग ने पूरी तैयारी के साथ यह सर्वे कार्रवाई शुरू की। गुरुवार सुबह आयकर अधिकारियों की टीम सुरक्षा बलों के साथ कारोबारी के ठिकानों पर पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू की।
आयकर विभाग की टीम ने सर्वे के दौरान लेन-देन से जुड़े कागजात, अकाउंट बुक्स, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की गहन जांच की। इसके साथ ही राइस मिल में मौजूद स्टॉक रजिस्टर, धान-चावल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और जीएसटी दस्तावेजों को भी खंगाला गया।
बताया जा रहा है कि सर्वे के दौरान अधिकारियों ने कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों से डेटा भी जुटाया है, ताकि आय और खर्च का सही आकलन किया जा सके। हालांकि, आयकर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि राजेश गुप्ता गयाजी और आसपास के इलाकों में धान और चावल के बड़े कारोबारी माने जाते हैं। उनका कारोबार कई वर्षों से चल रहा है और उनकी राइस मिल से बड़ी मात्रा में चावल का व्यापार होता है। ऐसे में आयकर विभाग की इस कार्रवाई को कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।
सर्वे कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। कारोबारी जगत में इस कार्रवाई को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में कृषि उत्पादों के व्यापार में टैक्स अनुपालन को लेकर सख्ती बढ़ी है और इसी के तहत यह कार्रवाई की गई है।
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, सर्वे के दौरान यदि आय से अधिक संपत्ति, बेहिसाब नकदी या फर्जी लेन-देन से जुड़े सबूत मिलते हैं, तो आगे की कार्रवाई और सख्त हो सकती है। इसमें नोटिस जारी करने से लेकर जुर्माना और कानूनी प्रक्रिया भी शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सर्वे कार्रवाई का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि कर अनुपालन को बढ़ावा देना और कर चोरी पर लगाम लगाना होता है। इससे अन्य कारोबारियों को भी स्पष्ट संदेश जाता है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दिनभर चली इस सर्वे कार्रवाई के बाद आयकर विभाग द्वारा विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कारोबारी के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल गयाजी में आयकर विभाग की यह कार्रवाई कारोबारी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

