सरकार ने बदले जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम! नए बिल में शामिल हुए ये बड़े प्रावधान, जाने आम लोगों के लिए खास
लोकसभा में पास होने के बाद, राज्यसभा ने मंगलवार (4 अगस्त) को 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक' पास कर दिया। यह विधेयक 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969' में और संशोधन करना चाहता है। विपक्ष के हंगामे के बीच दोपहर 2 बजे जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि इस विधेयक का मकसद 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969' की धारा 13(3) में संशोधन करना है, ताकि देर से पंजीकरण से जुड़े नियमों को सख्त किया जा सके।
इस विधेयक के ज़रिए सरकार ने देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली में अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत, अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी घटना के एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो पंजीकरण केवल ज़िला मजिस्ट्रेट, SDM या ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी से ही किया जा सकता है। ये संशोधन देर से पंजीकरण के नियमों को सख्त करने और जन्म व मृत्यु की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए किए गए हैं।
**दो साल से ज़्यादा समय वाले मामलों के लिए नियम**
गृह राज्य मंत्री ने बताया कि अगर जन्म या मृत्यु के बाद दो साल से ज़्यादा समय बीत चुका है, तो पंजीकरण के लिए अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) का आदेश ज़रूरी होगा। उनके अनुसार, सक्षम अधिकारी द्वारा पंजीकरण की अनुमति देने से पहले दी गई जानकारी की सच्चाई की जांच की जाएगी। मंत्री के जवाब के बाद, विधेयक को ध्वनि मत से पास कर दिया गया।
**लोकसभा से पहले ही पास हो चुका है विधेयक**
विपक्ष के सदस्यों के हंगामे के बीच, लोकसभा ने 31 जुलाई को बिना चर्चा के विधेयक पास कर दिया था। विपक्ष के सदस्यों का तर्क था कि यह एक अहम विधेयक है और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में मौजूद रहना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री की अनुपस्थिति के खिलाफ नारे भी लगाए। हंगामे के बीच विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा हुई और गृह राज्य मंत्री राय ने चर्चा का जवाब दिया।

