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गंगनहर से इंदिरा गांधी नहर तक की पूरी कहानी

बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह को राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में नहर के माध्यम से पानी पहुंचाने की पहल के लिए याद किया जाता है। गंग नहर का निर्माण 1920 के दशक में हुआ और 1927 में इसका उद्घाटन हुआ। बाद में आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के साथ राजस्थान नहर परियोजना विकसित हुई, जिसे आगे चलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना नाम दिया गया।  नाम बदलने की मांग करने वालों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में पानी पहुंचाने की ऐतिहासिक शुरुआत महाराजा गंगा सिंह के प्रयासों से हुई थी, इसलिए नहर का नाम उनके सम्मान में गंग नहर किया जाना चाहिए। ऐसी मांगों में यह भी तर्क दिया जाता है कि इससे राजस्थान के जल संसाधन विकास के इतिहास में महाराजा गंगा सिंह के योगदान को उचित पहचान मिलेगी।  हालांकि, गंग नहर और वर्तमान इंदिरा गांधी नहर परियोजना को एक ही नहर मानना सही नहीं है। दोनों का ऐतिहासिक और परियोजनागत संदर्भ अलग है। इसलिए नाम बदलने की बहस में दोनों परियोजनाओं के इतिहास को अलग-अलग समझना जरूरी है।

बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह को राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में नहर के माध्यम से पानी पहुंचाने की पहल के लिए याद किया जाता है। गंग नहर का निर्माण 1920 के दशक में हुआ और 1927 में इसका उद्घाटन हुआ। बाद में आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के साथ राजस्थान नहर परियोजना विकसित हुई, जिसे आगे चलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना नाम दिया गया।

नाम बदलने की मांग करने वालों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में पानी पहुंचाने की ऐतिहासिक शुरुआत महाराजा गंगा सिंह के प्रयासों से हुई थी, इसलिए नहर का नाम उनके सम्मान में गंग नहर किया जाना चाहिए। ऐसी मांगों में यह भी तर्क दिया जाता है कि इससे राजस्थान के जल संसाधन विकास के इतिहास में महाराजा गंगा सिंह के योगदान को उचित पहचान मिलेगी।

हालांकि, गंग नहर और वर्तमान इंदिरा गांधी नहर परियोजना को एक ही नहर मानना सही नहीं है। दोनों का ऐतिहासिक और परियोजनागत संदर्भ अलग है। इसलिए नाम बदलने की बहस में दोनों परियोजनाओं के इतिहास को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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