LPG सिलेंडर ब्लास्ट से उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार: एक झटके में चली गईं 4 जिंदगियां, मासूम बच्चों के सिर से उठा साया
दिल्ली के नजफगढ़ में हुए गैस धमाके ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया। एक संदिग्ध एलपीजी गैस लीकेज के कारण हुए धमाके में 12 दिनों के भीतर एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद 53 वर्षीय रामजी लाल के सामने जिंदगी की सबसे कठिन चुनौती खड़ी हो गई है। उन्होंने अपनी पत्नी, बेटे, बेटी और बहू को खो दिया है। अब उन्हें परिवार के दो मासूम बच्चों की देखभाल भी करनी है।
22 सितंबर की रात हुआ था दर्दनाक हादसा
यह हादसा 22 सितंबर की रात दिल्ली के नजफगढ़ स्थित रणाजी एन्क्लेव में हुआ था। जानकारी के मुताबिक, घर में संदिग्ध एलपीजी गैस लीकेज के कारण धमाका हुआ, जिसमें बच्चों समेत छह लोग झुलस गए थे। हादसे के बाद सभी घायलों को तत्काल आईजीआई अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद सभी लोग स्वस्थ होकर घर लौट आएंगे, लेकिन वक्त के साथ उनकी उम्मीदें टूटती चली गईं। अस्पताल में इलाज के दौरान एक-एक करके चार लोगों ने दम तोड़ दिया।
12 दिनों में चार अपनों की मौत
इस हादसे में रामजी लाल के परिवार को एक के बाद एक गहरे सदमे झेलने पड़े।
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28 सितंबर: 29 वर्षीय बेटी मोनिका की मौत हो गई।
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1 अक्टूबर: 25 वर्षीय बेटे केशव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
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3 अक्टूबर: 24 वर्षीय बहू सोनम की भी मौत हो गई।
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4 अक्टूबर: 50 वर्षीय पत्नी कमलेश जिंदगी की जंग हार गईं।
महज 12 दिनों के भीतर परिवार के चार सदस्यों की मौत ने रामजी लाल की दुनिया उजाड़ दी। जिस घर में कभी परिवार की हंसी-खुशी गूंजती थी, वहां अब अपनों को खोने का दर्द और भविष्य की चिंता रह गई है।
दो मासूम बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी
इस दर्दनाक हादसे का सबसे दुखद पहलू यह है कि परिवार के दो छोटे बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है। केशव और सोनम का तीन महीने का बेटा युवांश अब अपने दादा रामजी लाल के सहारे है। वहीं, मोनिका की चार साल की बेटी दिया भी इस हादसे में झुलस गई थी।मां को खोने के बाद इन दोनों बच्चों को प्यार, देखभाल और सुरक्षित भविष्य की जरूरत है। ऐसे में रामजी लाल के सामने खुद को संभालने के साथ-साथ दोनों मासूमों की परवरिश की बड़ी जिम्मेदारी भी आ गई है।
एक हादसे ने बदल दी पूरे परिवार की जिंदगी
नजफगढ़ की यह घटना गैस लीकेज से होने वाले हादसों के खतरनाक परिणामों की याद दिलाती है। एक संदिग्ध गैस रिसाव से शुरू हुआ हादसा पूरे परिवार के लिए कभी न भरने वाला दुख बन गया। हालांकि, धमाके के सटीक कारणों और परिस्थितियों की पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर ही की जा सकती है।रामजी लाल के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने गम से उबरना और दोनों बच्चों को संभालना है। 12 दिनों में चार अपनों को खोने का दर्द कितना गहरा होगा, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

